Crime Branch Arrests Absconding Life Convict : कानून की पकड़ से 26 साल तक बचता रहा उम्रकैद का कैदी आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। एआरएससी टीम ने 1 करोड़ रुपये की फिरौती के लिए किए गए 31 साल पुराने अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा पाए फरार आरोपी अमित यादव (57) को देहरादून, उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है। आरोपी वर्ष 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद वापस जेल नहीं लौटा था। इसके बाद उसने पहचान बदलकर देहरादून में नई जिंदगी शुरू कर ली और बिल्डर बन गया। स्पेशल सीपी क्राइम एच.जी.एस. धालीवाल के मार्गदर्शन में डीसीपी संजीव कुमार यादव की देखरेख में एसीपी संजय नागपाल व इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की नेतृत्व की टीम ने यह कार्रवाई की है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामला वर्ष 1995 का है। 12 सितंबर की शाम ऋषि सेठी अपनी कार में एआईएमएस निदेशक के आवास के पास बैठे थे। इसी दौरान तीन-चार बदमाशों ने उन्हें जबरन काबू किया, मारपीट कर आंखों पर पट्टी बांधी और उनकी ही कार में अगवा कर लिया। इसके बाद उन्हें बंधक बनाकर 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। पुलिस ने जाल बिछाकर मेरठ के होटल मयूर के कमरा नंबर 221 में 10 लाख रुपये की फिरौती रखवाई। 16 सितंबर 1995 को अमित यादव फिरौती की रकम लेने पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे दबोच लिया। उसके कब्जे से पूरी 10 लाख रुपये की रकम बरामद हुई। उसकी निशानदेही पर गाजियाबाद के राजनगर स्थित किराये के मकान से बंधक बनाए गए ऋषि सेठी को बरामद कर लिया गया। वह स्टोर रूम में जंजीर से बंधे मिले थे।
जमानत मिली और फिर हो गया फरार
अमित यादव को मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की और जनवरी 2000 में एक महीने की अंतरिम जमानत हासिल कर ली। लेकिन जमानत अवधि समाप्त होने के बाद उसने सरेंडर नहीं किया। उसकी अपील भी दिसंबर 2000 में खारिज हो गई। इसके बाद उसके खिलाफ 5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर उसे भगोड़ा घोषित किया गया।
इसके बाद क्राइम रिकॉर्ड ऑफिस और फिंगरप्रिंट ब्यूरो की मदद ली गई। वर्ष 1999 में सजा के समय दर्ज किए गए बायोमेट्रिक रिकॉर्ड को तलाशकर आरोपी की पहचान पुख्ता की गई। जांच में पता चला कि फरारी के बाद अमित पहले ऋषिकेश गया और फिर वर्ष 2001 में देहरादून पहुंच गया।



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