Ankita Bhandari Murder Case : अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय के लिए मांग कर रहे उनके माता-पिता को पुलिस ने गुरुवार की सुबह इंडिया गेट से करीब 3:45 बजे हिरासत मे ले लिया,जिसके बाद करीब दो घंटे बाद उन्हे रिहा कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार कांग्रेस नेता पवन खेड़ा व अन्य कार्यकर्ताओ को इंडिया गेट से हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने CRPF के साथ मिलकर यह कार्रवाई की थी। सभी प्रदर्शनकारियों को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया है।
न्याय की मांग पर अड़ा परिवार
कांग्रेस नेता और मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि अंकिता के माता-पिता राष्ट्रपति भवन के सामने शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने परिवार का हौसला बढ़ाया, लेकिन देर रात पुलिस सब प्रदर्शनकारियों को हिरासत मे ले कर चली गई।
काजी निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि जिस पुलिस को कथित वीआईपी एंगल की जांच करनी चाहिए, वह अंकिता के माता-पिता को हिरासत में ले रही है. वही ये लड़ाई जब तक जारी रहेगी जब तक अंकिता को इंसाफ नहीं मिलेगा और दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।
अंकिता की मां ने कहा कि, “हम यह साफ़ करना चाहते हैं कि जब तक उनकी (दुष्यंत गौतम) नियुक्ति रद्द नहीं हो जाती, हम अपनी बात पर रहेंगे. अगर हमें यहां बैठने की इजाज़त नहीं मिली, तो हम अपने घरों में ही भूख हड़ताल पर बैठेंगे.”
वहीं अंकिता के पिता ने कहा, ‘हम सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेट देते है कि सिक्किम के गवर्नर के तौर पर दुष्यंत कुमार की नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए. अगर इसे रद्द नहीं किया गया, तो पूरे देश के लोग सड़कों पर उतरेंगे और इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी”।
राहुल और प्रियंका ने की थी परिवार से मुलाकात
इससे पहले बुधवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। जिसके बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी ने भाजपा को निशाने पर लिया था।
आखिर क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें, ऋषिकेश के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी और उसका शव चीला नहर में बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक और पूर्व बीजेपी नेता के बेटे पुलकित आर्य समेत तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, परिवार और विपक्षी दल लगातार मामले मे कथित वीआईपी संलिप्तता की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है।


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