Cardiology Specialist Shortage India: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लिनिकल कार्डियोलॉजी (पजीडीसीसी) को आखिरकार आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है। दो दशकों से चल रही कानूनी और नीतिगत जद्दोजहद के बाद इस कोर्स को अब क्लिनिकल कार्डियो फिजिशियन (नॉन-इनवेसिव) के रूप में पुनः नामित किया गया है। इस उपलब्धि की घोषणा इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट ने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में कार्डियोलॉजिस्ट की भारी कमी को दूर करने की दिशा में अहम साबित होगा। भारत में लगभग 28 प्रतिशत मौतें हृदय रोगों से होती हैं, जबकि 140 करोड़ की आबादी पर केवल 5-6 हजार विशेषज्ञ ही उपलब्ध हैं। ऐसे में यह दो वर्षीय पोस्ट-एमबीबीएस कार्यक्रम प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा।
शहरी-ग्रामीण असमानता पर असर
आईएसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कपिल खन्ना के अनुसार, देश की 65-70% आबादी शहरों से बाहर रहती है, जबकि 80% कार्डियोलॉजिस्ट शहरी क्षेत्रों में केंद्रित हैं। इस असंतुलन को दूर करने में यह कोर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पूर्व निदेशक प्रो. ए. के. अग्रवाल ने बताया कि अब तक 1,700 से अधिक डॉक्टर इस कार्यक्रम को पूरा कर चुके हैं। मान्यता मिलने के बाद इन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नियामकीय बाधाओं से जूझने के बाद यह सफलता मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बड़ा कदम है, जो खासकर ग्रामीण भारत में हृदय रोग उपचार को नई दिशा देगा।


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