ब्लड प्रेशर की दवाओं पर सवाल! सीडीएससीओ की फरवरी 2026 की एनएसक्यू रिपोर्ट में 198 दवा बैच लैब टेस्ट में फेल

Cdsco NSQ List February 2026

Cdsco NSQ List February 2026: देश में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन (सीडीएससीओ) की फरवरी 2026 की “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी” (एनएसक्यू) रिपोर्ट में 198 दवा बैच लैब टेस्ट में फेल पाए गए। इनमें 18 बैच ब्लड प्रेशर की दवाओं के थे, जो किसी एक थेराप्यूटिक कैटेगरी में सबसे अधिक संख्या है। रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी दवाओं ने “डिसॉल्यूशन टेस्ट” में असफलता दिखाई। यह टेस्ट इस बात को मापता है कि कोई टैबलेट शरीर में तय दर से अपना सक्रिय तत्व (एक्टिव इंग्रीडिएंट) छोड़ती है या नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस टेस्ट में फेल होने का मतलब है कि दवा सही मात्रा या सही गति से असर नहीं कर रही। हैरानी की बात यह है कि टेल्मिसार्टन के 13 बैच अलग-अलग शहरों—गुवाहाटी से लेकर तिरुवनंतपुरम—तक में फेल पाए गए। यह दवा आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए दी जाती है। इसके अलावा एटेनोलोल, एनालाप्रिल, मेटोप्रोलोल और लेबेटालोल जैसी दवाएं भी टेस्ट में फेल रहीं।

बीपी की दवा का फेल होना साइलेंट फेलियर

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. एन.के. गांगुली के अनुसार, यह एक साइलेंट फेलियर है। मरीज दवा लेता रहता है, लेकिन ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं होता। उन्होंने कहा कि इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है, जिससे दिल, किडनी और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। रिपोर्ट में सामने आया कि यह समस्या किसी एक कंपनी या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बद्दी, ऊना, पुणे, उज्जैन, सिक्किम और देहरादून समेत कई जगहों की कंपनियों के बैच फेल हुए हैं। इसका फैलाव असम, ओडिशा, चेन्नई और केरल तक देखा गया, जो इस समस्या के सिस्टम स्तर पर होने की ओर इशारा करता है।

यह स्थिति पब्लिक हेल्थ के लिए खतरनाक

हैदराबाद के फार्माकोलॉजिस्ट डॉ. जी श्रीनिवास के अनुसार, यह स्थिति पब्लिक हेल्थ के लिए खतरनाक है क्योंकि मरीज और डॉक्टर बिना लैब जांच के इस कमी को पहचान नहीं सकते। दवाएं देखने में सामान्य रहती हैं, लेकिन उनका असर कम या अनियमित हो सकता है। भारत में लगभग 22 करोड़ लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं, लेकिन केवल 12 प्रतिशत मरीज ही अपना ब्लड प्रेशर नियंत्रित रख पाते हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता में कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दवा निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने और नियमित जांच बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी इलाज मिल सके।

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