जन्मपत्री व टीकाकरण कार्ड जन्म तिथि का कानूनी प्रमाण नहीं

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Vaccination Cards Not Valid Age Proof: दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो से जुड़े एक मामले में जन्मपत्री व टीकाकरण कार्ड को जन्मतिथि का कानूनी प्रमाण पत्र मानने से इनकार करते हुए आरोपी को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण’ (पॉक्सो) अधिनियम के तहत किसी को दोषी ठहराने के लिए पीड़िता की उम्र का “प्रामाणिक” दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर ड्यूडेजा की खंडपीठ ने कहा कि जन्मपत्री और टीकाकरण कार्ड को जन्म तिथि का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। खंडपीठ ने…

Vaccination Cards Not Valid Age Proof: दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो से जुड़े एक मामले में जन्मपत्री व टीकाकरण कार्ड को जन्मतिथि का कानूनी प्रमाण पत्र मानने से इनकार करते हुए आरोपी को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण’ (पॉक्सो) अधिनियम के तहत किसी को दोषी ठहराने के लिए पीड़िता की उम्र का “प्रामाणिक” दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर ड्यूडेजा की खंडपीठ ने कहा कि जन्मपत्री और टीकाकरण कार्ड को जन्म तिथि का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता।

खंडपीठ ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों में पीड़िता की आयु “मुख्य प्रश्न” होती है। मूल जन्म प्रमाण पत्र या किसी वैधानिक प्रमाण के अभाव में, पॉक्सो अधिनियम के कठोर प्रावधान लागू नहीं किए जा सकते। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जनवरी 2013 में आरोपी ने एक किशोरी का अपहरण किया था, जिसकी उम्र उस समय लगभग 16 वर्ष बताई गई थी। किशोरी के घर फोन करने के बाद उसे अमृतसर से बरामद किया गया था। पुलिस ने आरोपी को अमृतसर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर उस पर भारतीय दंड संहिता के तहत अपहरण और बलात्कार, तथा पॉक्सो अधिनियम के तहत पेनट्रेटिव सेक्सुशल असॉल्ट के तहत केस दर्ज किया था।

सभी आरोपों से बरी कर दिया

आरोपी ने ट्रायल के दौरान खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। जुलाई 2019 में ट्रायल कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता नाबालिग होने की पुष्टि करने वाले दस्तावेज कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं थे। किशोरी के माता-पिता न तो उसकी सटीक जन्म तिथि बता सके और न ही रिकॉर्ड पर मूल जन्म प्रमाण पत्र पेश कर सके। लड़की के पिता ने गवाही दी कि स्कूल में दाखिले के लिए उन्होंने जन्मपत्री का उपयोग किया था। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह माना गया है कि जन्मपत्री को जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में नहीं माना जा सकता। इसलिए, जन्मपत्री के आधार पर स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज की गई उम्र को भी आयु का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।