Independence Day : स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चौकसी के बीच दिल्ली पुलिस ने नशे के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। साउथ जिला स्पेशल स्टाफ ने दो अलग-अलग ऑपरेशन में नेपाल से दिल्ली पहुंचाई गई 106.250 किलो उच्च गुणवत्ता वाली चरस बरामद की है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 109 करोड़ रुपये बताई गई है। कार्रवाई में चार नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनकी पहचान भारत थापा, गोविंद बुधा और दो महिलाओं के रूप में हुई है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि नेपाल सीमा से सड़क मार्ग के जरिए चरस दिल्ली लाई जाती थी और फिर इसे दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया जाता था। ज्वाइंट सीपी विजय कुमार के मार्गदर्शन में डीसीपी अनंत मित्तल की देखरेख में एसीपी बलराम सिंह बेनीवाल व इंस्पेक्टर अनुज कुमार के नेतृत्व की टीम ने यह कार्रवाई की है।
स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी है। ऐसे समय में इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी को पुलिस की खुफिया निगरानी और सक्रियता की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। स्पेशल स्टाफ ने पहले छोटे सप्लायरों तक पहुंच बनाई और पूछताछ व तकनीकी जांच के जरिए नेटवर्क के बड़े स्टोरेज प्वाइंट का पता लगाया। पुलिस के मुताबिक, पहली कार्रवाई 29 जून को कोटला मुबारकपुर इलाके में की गई थी। टीम ने तीन नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 8.598 किलो चरस बरामद की थी।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ, तकनीकी निगरानी, वित्तीय लेनदेन और स्थानीय खुफिया जानकारी के जरिए नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वजीराबाद इलाके में चरस का बड़ा स्टॉक छिपाकर रखा गया है। 12 अगस्त को टीम ने चिन्हित ठिकाने पर छापा मारकर 97.652 किलो चरस बरामद की। यह चरस 13 प्लास्टिक बैग में रखी गई थी। मौके से मिक्सिंग मशीन और पैकिंग सामग्री भी मिली। इस कार्रवाई में 32 वर्षीय एक नेपाली महिला को गिरफ्तार किया गया।
नेपाल बॉर्डर से सड़क मार्ग के जरिए दिल्ली आती थी खेप
पुलिस जांच में सामने आया कि नेटवर्क नेपाल के सोनोली बॉर्डर क्षेत्र के आसपास सक्रिय सप्लायरों से चरस हासिल करता था। इसके बाद सड़क मार्ग से इसे दिल्ली लाकर अलग-अलग ठिकानों पर स्टोर किया जाता था। सोशल मीडिया के जरिए ऑर्डर लेने और कैश तथा बैंकिंग माध्यमों से भुगतान किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। आरोपियों पर डिलीवरी के लिए ऑटो और बाइक टैक्सी का इस्तेमाल करने तथा सौदे के बाद डिजिटल बातचीत डिलीट कर सबूत मिटाने का भी आरोप है।
वजीराबाद और मजनू का टीला समेत दिल्ली के कुछ इलाकों को कथित तौर पर सप्लाई के प्रमुख केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस को जांच में बिनमाया नामक नेपाली नागरिक के कथित मुख्य सप्लायर होने की जानकारी मिली है। हरि नामक एक अन्य नेपाली नागरिक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अब पुलिस नेपाल से दिल्ली तक पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन, पैसों के लेनदेन और स्थानीय वितरकों की पहचान करने में जुटी है।



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