दिल्ली में कोरोना वायरस (कोविड-19) मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी में हर दिन संक्रमितों और मृतकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि पिछले 10-12 साल से हर साल अक्टूबर और नवंबर में पराली जलने की वजह से पूरा उत्तर भारत परेशान रहता है। इस बारे में अब तक कोई ठोक काम नहीं किया गया था, हर साल बस इस समय शोर होता है, राजनीति होती है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के 24 गांव में बायो-डिकम्पोज़र को छिड़कने के 20 दिन बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि 70-95% तक डंठल गल चुका था, इससे किसान बहुत खुश हैं। अब समाधान तो निकल गया है, अब बारी सरकारों की है, क्या वो इसको लागू करेंगी? सीएम केजरीवाल ने कहा कि अभी दिल्ली में कोरोना बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण प्रदूषण है। दिल्ली के लोगों ने पिछले महीने तक कोरोना पर काबू पा लिया था।
उन्होंने कहा कि ” पिछले कुछ दिनों से कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। मैं इसको लेकर चिंतित हूं। हमने इसे नियंत्रण में करने के लिए सभी उचित कदम उठाए हैं। अगले सप्ताह हम इस संबंध में और कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। मेरा मानना है कि स्थिति सात से 10 दिन के भीतर नियंत्रण में आ जानी चाहिए और मामले कम होने लगेंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ दिल्ली में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदूषण है। यहां 20 अक्टूबर तक स्थिति नियंत्रण में थी।’’ एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा द्वारा पराली को गलाने के लिए तैयार किए गए मिश्रण से दिल्ली के 24 गांवों में 70 से 95 फीसदी पराली विघटित हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के पास एक याचिका दाखिल करेगी और इसमें इस रिपोर्ट को शामिल करेगी और अपील करेगी कि सभी राज्य सरकारों को इसे लागू करने के निर्देश जारी किए जाएं।
बता दें कि दिल्ली में पांच महीनों में एक दिन में सर्वाधिक 104 कोरोना वायरस संक्रमित लोगों ने बृहस्पतिवार को दम तोड़ा। इसके साथ ही महामारी के 7,053 नए मामलों की पुष्टि हुई। दिल्ली में त्योहारों के मौसम के बीच संक्रमण दर 11.71 प्रतिशत है। राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को सबसे ज्यादा 8,593 नए मामले आए थे और 85 मरीजों की मौत हुई थी।
बुलेटिन के मुताबिक, बृहस्पतिवार को पांच महीनों में एक दिन में सबसे ज्यादा 104 मरीजों की मौत हुई। इसके बाद कुल मृतक संख्या 7,332 हो गई है। शहर में 16 जून को 93 मरीजों की मौत हुई थी। शहर में संक्रमण का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या अब 43,116 हो गई है। वहीं, कुल मामले बढ़कर 4,67,028 हो गए हैं।


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