Cyber : न ओटीपी बताया, न पिन शेयर किया…जानें कैसे उड़ गए खाते से इतने रुपये?

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Cyber : अगर आपको लगता है कि ओटीपी, पिन और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने पर आपका बैंक खाता पूरी तरह सुरक्षित है तो यह खबर आपको सावधान कर सकती है। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने एक महिला का मोबाइल हैक कर उसके खाते से एक लाख रुपये निकाल लिए। हैरानी की बात यह है कि पीड़िता ने न तो किसी को ओटीपी बताया था और न ही अपनी बैंकिंग जानकारी साझा की थी। पुलिस ने इस मामले में म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह…

Cyber : अगर आपको लगता है कि ओटीपी, पिन और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने पर आपका बैंक खाता पूरी तरह सुरक्षित है तो यह खबर आपको सावधान कर सकती है। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने एक महिला का मोबाइल हैक कर उसके खाते से एक लाख रुपये निकाल लिए।

हैरानी की बात यह है कि पीड़िता ने न तो किसी को ओटीपी बताया था और न ही अपनी बैंकिंग जानकारी साझा की थी। पुलिस ने इस मामले में म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश के रतलाम निवासी फईम बाग (26), शुभम गोयल (27), दीपक परजापत (28) और राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी मनोज कुमार टेलर (39) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीन दिन तक लगातार पीछा करते हुए करीब 1500 किलोमीटर की दूरी तय की और मध्य प्रदेश के रतलाम व जावरा इलाके से आरोपियों को दबोच लिया। इनके कब्जे से चार मोबाइल फोन और सात सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।

डीसीपी राजा बांठिया ने बताया कि वजीराबाद निवासी 31 वर्षीय महिला ने 26 मई को शिकायत दी थी कि उसके बैंक खाते से एक लाख रुपये धोखाधड़ी से ट्रांसफर कर लिए गए हैं। महिला ने पुलिस को बताया कि उसने कभी किसी को अपना ओटीपी, पिन, पासवर्ड या अन्य बैंकिंग जानकारी नहीं दी। शिकायत के आधार पर साइबर थाना नॉर्थ में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एसीपी ऑपरेशन विशेष धत्तरवाल के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर रोहित गहलोत के नेतृत्व में एसआई मनीष तंवर, कॉन्स्टेबल नितीश, कॉन्स्टेबल कमलेश और हेड कॉन्स्टेबल भारत की टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। बैंक खातों और मनी ट्रेल की गहन पड़ताल में पता चला कि ठगी की रकम फईम बाग के खाते में पहुंची थी, जब पुलिस उसके पते पर पहुंची तो वह वहां नहीं मिला। इसके बाद सर्विलांस और तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस की गई।

कमीशन का लालच देकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे बैंक खाते

पूछताछ में खुलासा हुआ कि शुभम और दीपक लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते साइबर ठगों के लिए उपलब्ध कराते थे। फईम को भी दो हजार रुपये देने का झांसा देकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल किया गया। एक लाख रुपये खाते में आने के बाद फईम ने बैंक से रकम निकालकर दीपक को दे दी।

दीपक ने अपना कमीशन रखने के बाद बाकी रकम मनोज को सौंप दी, जिसने आगे इसे गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा दिया। जांच के दौरान पुलिस को एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 10 अन्य साइबर शिकायतें भी इन आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए चार बैंक खातों से जुड़ी मिलीं। इससे संकेत मिलता है कि यह गिरोह लंबे समय से साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का काम कर रहा था। पुलिस अब फरार आरोपी परवीन और अन्य साइबर अपराधियों की तलाश कर रही है।

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Avinay