CM रेखा गुप्ता ने किया 35 वें वार्षिक आम महोत्सव का शुभारम्भ, बोलीं – “भारत की सांस्कृतिक पहचान”

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Delhi : मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित 35वें तीन दिवसीय ‘वार्षिक आम महोत्सव 2026’ का दिल्ली हाट, जनकपुरी में शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आम केवल फलों का राजा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और बचपन की अनगिनत यादों से जुड़ा एक भावनात्मक प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में आयोजित आम महोत्सव नई पीढ़ी को उसी अनुभव और भारतीय विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, आशीष सूद एवं मनजिंदर सिंह सिरसा भी उपस्थित थे। देशभर की विभिन्न…

Delhi : मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित 35वें तीन दिवसीय ‘वार्षिक आम महोत्सव 2026’ का दिल्ली हाट, जनकपुरी में शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आम केवल फलों का राजा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और बचपन की अनगिनत यादों से जुड़ा एक भावनात्मक प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में आयोजित आम महोत्सव नई पीढ़ी को उसी अनुभव और भारतीय विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, आशीष सूद एवं मनजिंदर सिंह सिरसा भी उपस्थित थे। देशभर की विभिन्न किस्मों के आमों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित करना और लोगों को उनका स्वाद चखने का अवसर उपलब्ध कराना भारतीय कृषि एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनीय पहल है।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि आज भारतीय आम केवल एक फल या उपहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय आम अपनी गुणवत्ता और लोकप्रियता के कारण देश की पहचान को मजबूत कर रहा है तथा ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी नई पहचान मिली है। दिल्ली सरकार का पर्यटन विभाग राजधानी को देश के प्रमुख पर्यटन एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

फेस्टिवल में क्या है खास?

महोत्सव में आम की 400 किस्में, जिनमें हुस्नआरा, रटौल, रामकेला, केसर, मल्लिका, अम्रपाली, फजली, हाथीझूल सहित अनेक प्रसिद्ध किस्में शामिल हैं। कुछ आम अंगूर के आकार जितने छोटे हैं, जबकि कुछ पपीते जितने बड़े, जो भारत में पाई जाने वाली आम की असाधारण विविधता को दर्शाते हैं। आम बीटा-कैरोटीन का समृद्ध स्रोत है, जो शरीर में विटामिन-ए में परिवर्तित होकर स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादक अपने श्रेष्ठ फलों का प्रदर्शन करेंगे। इनमें से कई किस्में पारंपरिक किसान परिवारों द्वारा दशकों तक किए गए चयन, कलमकारी (ग्राफ्टिंग) और निरंतर प्रयोगों का परिणाम हैं। महोत्सव कृषि वैज्ञानिकों एवं बागवानी संस्थानों के उन प्रयासों को भी रेखांकित करता है, जो उत्कृष्ट एवं नई आम किस्मों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

फेस्टिवल में देश भर से आये प्रतिभागी व प्रमुख संस्थान

आम उत्पादकों, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सरकारी विभागों तथा किसान संगठनों की सक्रिय भागीदारी है। प्रमुख प्रतिभागियों में आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा), आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (लखनऊ), गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (पंतनगर)

इसके अलावा, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हिसार), उद्यान निदेशालय (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश), बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर, भागलपुर), किसान मैंगो सोसायटी, अर्थ मैंगो सोसायटी, मलिहाबाद मैंगो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ मैंगो डाइवर्सिटी, अवध एग्रीटेक (मलिहाबाद) तथा प्रमुख उत्पादक तारिक मुस्तफा, रामबीर, अखलाक अली, मोहम्मद शाहिद एवं मोहम्मद जुनैद शामिल हैं।

सौ है दाम जितने खाओ आम

‘सौ है दाम, जितने खाओ आम।’ जैसे आयोजन को लोकप्रियता मिल रही है। आगंतुक यहां ताजे आमों के साथ-साथ आम से बने विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पाद, खाद्य सामग्री और आम के पौधे भी खरीद सकेंगे। महोत्सव का सबसे लोकप्रिय आकर्षण पुरुष एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग आयोजित होने वाली मैंगो ईटिंग प्रतियोगिता है।

इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम, हस्तशिल्प एवं कारीगर उत्पादों की प्रदर्शनी, बच्चों के लिए विशेष किड्स ज़ोन, आकर्षक सेल्फी पॉइंट तथा विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों के फूड स्टॉल भी महोत्सव का हिस्सा होंगे, जिससे यह आयोजन पूरे परिवार के लिए मनोरंजन और अनुभव का एक विशेष अवसर बन जाएगा।

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