नई दिल्ली : दिल्ली कांग्रेस प्रदेश प्रभारी पीसी चाको को लेकर पार्टी के भीतर घमासान मच गया है। शुक्रवार को स्थिति और भयानक हो गई जब पूर्व पार्षद और कांग्रेस के टिकट पर साकेत विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव लड़ चुके रोहित मनचंदा ने पीसी चाको पर लिफ्ट से धक्का देने का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग कर दी। रोहित ने मुद्दे को लेकर एक विडियो मैसेज भी वायरल किया है।
रोहित का कहना है कि वो चाको के स्वागत के लिए दिल्ली प्रदेश की दूसरे तल पर लिफ्ट के बाहर खड़े थे, लेकिन चाको ने उन्हें धक्का मारकर हटा दिया और कहा कि आप कांग्रेस कार्यालय में नहीं आ सकते। यहां यह बता दें कि जब से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई है तभी से पीसी चाको के खिलाफ कांग्रेस के भीतर आवाज उठ रही है। पार्टी के कार्यकर्ता कह रहे हैं कि पीसी चाको के नेतृत्व में अब तक चार चुनाव हार चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी हार की जिम्मेदारी नहीं ली।
जबकि शीला दीक्षित और उससे पहले के अध्यक्षों ने भी हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। चाको पर इस बात का भी आरोप लग रहे हैं कि वह पार्टी के भीतर गुटबाजी को हवा देते हैं। शुक्रवार को इस घटना के बाद प्रदेश कार्यालय में खासा हंगामा मचा। जिसके बाद रोहित मनचंदा ने पीसी चाको के तत्काल इस्तीफे की मांग की और चाको की शिकायत प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित से करने की बात कही।
रोहित का आरोप है कि चाको के नेतृत्व में दिल्ली में सारे चुनाव कांग्रेस हारी ऐसे में जब राहुल गांधी इस्तीफे की बात करते हैं तो पीसी चाको को भी इस्तीफा दे देना चाहिए। इस बाबत उन्होंने 6 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल किया था। जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस संबंध में रायशुमारी की थी। हालांकि पीसी चाको से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने इस घटना को ही नकार दिया और कहा कि जिसने आपको बताया है उससे जाकर पूछिए। दूसरी तरफ रोहित मनचंदा के साथ हुई इस घटना के बाद अचानक कुछ पुराने कांग्रेसी भी चाको पर हमलावर हो गए।
वरिष्ठ कांग्रेसी रामपाल त्यागी, रविन्द्र त्रिपाठी, बलदेव राज, अनिल तंवर इत्यादी नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान को एक पत्र लिख कर चाको के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इन कांग्रेसियों ने अपने पत्र में कहा है कि पीसी चाको ने कांग्रेस को दिल्ली में कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने ही लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी से गठबंधन की वकालत करते रहे जिसके कारण पार्टी के तीन महीने इसी उधेड़बुन में निकल गए। प्रत्याशियों को काम करने के लिए बहुत कम समय मिला, जिसका खामियाजा हार से चुकाना पड़ा।
रामपाल त्यागी का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय का चुनाव तक चाको की अगुवाई में लड़ा गया और वह हम लोग हार गए। लोकसभा चुनावों के दौरान जब उनकी सबसे ज्यादा जरूरत दिल्ली में थी तो वह केरल में अपने टिकट की कोशिश में लगे थे, उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया और इधर दिल्ली का भी बंटाधार कर दिया। इन वरिष्ठ नेताओं ने मांग की है पीसी चाको में जरा भी नैतिकता बची है तो उनको तुरंत अपना इस्तीफा दे देना चाहिए।


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