द्वारका को आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र बनाने की तैयारी तेज, एलजी ने उद्योग जगत से मांगे सुझाव

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Delhi : दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को द्वारका को राष्ट्रीय राजधानी का प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र बनाने की दिशा में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए शहरी पुनर्विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल नीतियां बेहद जरूरी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि द्वारका का औद्योगिक विकास स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और श्रम-केंद्रित होना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि एशिया की सबसे बड़ी नियोजित सब-सिटी…

Delhi : दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को द्वारका को राष्ट्रीय राजधानी का प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र बनाने की दिशा में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए शहरी पुनर्विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल नीतियां बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि द्वारका का औद्योगिक विकास स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और श्रम-केंद्रित होना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें।

एलजी तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि एशिया की सबसे बड़ी नियोजित सब-सिटी में शामिल द्वारका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता, उत्कृष्ट सड़क और मेट्रो संपर्क तथा विकसित हो रहे शहरी ढांचे के कारण निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार यहां वाणिज्य, आतिथ्य, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।

बैठक में रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर क्षेत्र के प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों के अलावा डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक भी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य उद्देश्य द्वारका में निवेश को बढ़ावा देने, कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में सुधार और निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना रहा।

उद्योग प्रतिनिधियों ने सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था को मजबूत करने, मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, आईटी, आईटीईएस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) को प्रोत्साहन देने तथा पर्यटन और स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के सुझाव दिए। साथ ही यशोभूमि और भारत मंडपम जैसे विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटरों का बेहतर उपयोग करने तथा पर्याप्त फाइव स्टार होटल विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में उपराज्यपाल ने कहा कि बदलती शहरी जरूरतों के अनुरूप फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) सहित विकास संबंधी मानकों की समीक्षा और युक्तिसंगत संशोधन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीतिगत सुधार दिल्ली की निवेश प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करेंगे।

PM मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के विजन के अनुरूप : उपराज्यपाल

डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि प्राधिकरण भविष्य के निवेश के लिए भूमि उपलब्ध करा रहा है तथा हाल ही में स्वीकृत ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति के माध्यम से पात्र परियोजनाओं को समयबद्ध और एकीकृत मंजूरी देने की व्यवस्था की गई है। वहीं दिल्ली सरकार ने नई औद्योगिक नीति, विभागों के बीच मंजूरी प्रक्रिया के एकीकरण और शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए बड़े सुधार किए जाने की जानकारी दी।

उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के विजन के अनुरूप दिल्ली में पारदर्शी, कुशल और निवेश-अनुकूल व्यवस्था विकसित की जा रही है। डीडीए भी समेकित योजना, बुनियादी ढांचे के उन्नयन और निवेशक-अनुकूल नीतियों के जरिए द्वारका को स्वच्छ, रोजगार सृजित करने वाला और प्रमुख निवेश केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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Avinay