Delhi Govt Health Policy: राष्ट्रीय राजधानी में कुष्ठ रोग के उन्मूलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार अब कुष्ठ रोग को ‘दिल्ली महामारी रोग अधिनियम’ के तहत एक अधिसूचित बीमारी घोषित करने जा रही है। इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य दिल्ली में ‘जीरो संक्रमण, शून्य विकलांगता’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
इस अधिसूचना के लागू होने के बाद, दिल्ली के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं चाहे वे बड़े अस्पताल हों, छोटे क्लीनिक हों या व्यक्तिगत चिकित्सक के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा कि वे कुष्ठ रोग के हर नए मामले की जानकारी संबंधित ‘जिला कुष्ठ रोग अधिकारी’ को दें।
Delhi Govt Health Policy: स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह का बयान

इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है। इसे ‘नोटिफ़ाएबल डिजीज’ बनाने से हमें समुदाय में छिपे हुए मामलों की जल्द पहचान करने और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। हमारा संकल्प है कि 2030 तक दिल्ली को पूरी तरह संचरण मुक्त बनाया जाए और हर मरीज को गरिमापूर्ण इलाज मिले।बॉक्सछिपे हुए मामलों पर नकेल कसना जरूरी…
आंकड़े बताते हैं कि भारत ने भले ही 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लिया था, लेकिन दुनिया के कुल मामलों में से लगभग 59 प्रतिशत अब भी भारत से ही सामने आते हैं। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, कुष्ठ रोग के करीब 44.1 फीसदी मरीजों का इलाज निजी केंद्रों में होता है, जिनकी सूचना ‘राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ तक नहीं पहुंच पाती। सूचना के इस अभाव के कारण बीमारी का संक्रमण अनजाने में फैलता रहता है और इलाज के तरीकों में एकरूपता न होने से ‘ड्रग रेजिस्टेंस’ का खतरा भी बढ़ जाता है। अनिवार्य रिपोर्टिंग इस अंतर को पाटने का काम करेगी।
बॉक्सएमडीटी और मुफ्त इलाज का लाभ
सरकार का मुख्य फोकस मानक मल्टी-ड्रग थेरेपी के जरिए तत्काल उपचार सुनिश्चित करना है। यह थेरेपी सभी सरकारी केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध है। अनिवार्य सूचना प्रणाली के माध्यम से न केवल बीमारी की समय पर पहचान होगी, बल्कि ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ और ‘पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफ़ाइलैक्सिस’ (पीईपी) के जरिए मरीजों के संपर्क में आए लोगों को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। यह प्रस्तावित अधिसूचना जीएनसीटीडी अधिनियम 1991 के तहत जारी की जाएगी। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और रिपोर्टिंग फॉर्मेट जल्द ही सभी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ साझा किए जाएंगे। यह कदम न केवल ‘कुष्ठ-मुक्त दिल्ली’ बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
Delhi Govt. New Policy: प्रमुख लाभ और भविष्य की राह

शीघ्र पहचान: विकलांगता के जोखिम को न्यूनतम करना।
निगरानी: उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में कड़ी निगरानी।
सामाजिक जागरूकता: रोग से जुड़े सामाजिक कलंक और भेदभाव को कम करना।
समानता: तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों की श्रेणी में दिल्ली का शामिल होना।
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