EWS आरक्षण पर दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: नहीं मिलेगी SC/ST/OBC जैसी उम्र में छूट, 10% आरक्षण ही काफी

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Delhi High Court UPSC Verdict: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यूपीएससी परीक्षाओं में उम्र में छूट के लिए ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार एससी, एसटी, ओबीसी के उम्मीदवारों के बराबर छूट का हकदार नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें केंद्र सरकार के तहत सीधी भर्तियों और नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के उम्मीदवारों के लिए उम्र में छूट और अतिरिक्त मौकों की मांग की गई थी। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीॅ ने कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र और मौकों…

Delhi High Court UPSC Verdict: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यूपीएससी परीक्षाओं में उम्र में छूट के लिए ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार एससी, एसटी, ओबीसी के उम्मीदवारों के बराबर छूट का हकदार नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें केंद्र सरकार के तहत सीधी भर्तियों और नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के उम्मीदवारों के लिए उम्र में छूट और अतिरिक्त मौकों की मांग की गई थी। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीॅ ने कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र और मौकों में छूट न देने का केंद्र सरकार का नीतिगत फैसला न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक। कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के विभिन्न उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को खारिज कर किया।

संवैधानिक प्रावधानों और भेदभाव के तर्कों पर कोर्ट का रुख

याचिका में तर्क दिया गया था कि संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया, लेकिन एससी/एसटी/ओबीसी उम्मीदवारों के विपरीत उन्हें ऊपरी आयु सीमा या मौकों की संख्या में कोई संबंधित छूट नहीं दी गई। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। हांलाकि, याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ईडब्ल्यूएस श्रेणी के सदस्यों को उम्र में छूट देने या मौकों की संख्या बढ़ाने के लिए ‘रिट ऑफ मैंडमस’ जारी करने का कोई मामला बनाने में विफल रहे।

पात्रता मानदंड और न्यायिक समीक्षा की सीमाएं

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह उन सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं से अनजान नहीं है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के तहत उम्मीदवारों के वर्गीकरण का आधार हैं। कोर्ट ने कहा कि इस श्रेणी में शामिल होने के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड, जानबूझकर, सख्त और विशिष्ट रखे गए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल वही लोग इसके दायरे में आएं, जो वास्तव में आर्थिक अभाव से पीड़ित हैं। साथ ही इस कोर्ट को उन संस्थागत सीमाओं के प्रति भी सचेत रहना चाहिए, जो न्यायिक समीक्षा के अधिकार क्षेत्र को सीमित करती हैं।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।