Delhi High Court UPSC Verdict: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यूपीएससी परीक्षाओं में उम्र में छूट के लिए ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार एससी, एसटी, ओबीसी के उम्मीदवारों के बराबर छूट का हकदार नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें केंद्र सरकार के तहत सीधी भर्तियों और नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के उम्मीदवारों के लिए उम्र में छूट और अतिरिक्त मौकों की मांग की गई थी। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीॅ ने कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र और मौकों में छूट न देने का केंद्र सरकार का नीतिगत फैसला न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक। कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के विभिन्न उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को खारिज कर किया।
संवैधानिक प्रावधानों और भेदभाव के तर्कों पर कोर्ट का रुख
याचिका में तर्क दिया गया था कि संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया, लेकिन एससी/एसटी/ओबीसी उम्मीदवारों के विपरीत उन्हें ऊपरी आयु सीमा या मौकों की संख्या में कोई संबंधित छूट नहीं दी गई। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। हांलाकि, याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ईडब्ल्यूएस श्रेणी के सदस्यों को उम्र में छूट देने या मौकों की संख्या बढ़ाने के लिए ‘रिट ऑफ मैंडमस’ जारी करने का कोई मामला बनाने में विफल रहे।


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