Delhi : शास्त्री पार्क फर्नीचर मार्केट में गत 22 मई को लगी भीषण आग की घटना को अभी ज्यादा समय भी नहीं बीता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आग से सबक लेने के बजाय यहां एक बार फिर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का सिलसिला तेजी से शुरू हो गया है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि फिर से यहां आम चलने के रास्तों, पार्किंग और सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर बड़े-बड़े फर्नीचर शोरूम खड़े किए जा रहे हैं।
एमसीडी व स्थानीय पुलिस इस पर कोई एक्शन लेने के लिए तैयार नहीं। निगम सूत्रों के अनुसार, जामा मस्जिद मीना बाजार क्षेत्र की कोट मार्केट को शास्त्री पार्क में पुनर्वास के तहत बसाया गया था, तब कारोबारियों को छोटी-छोटी दुकानें आवंटित की गई थीं।
इन दुकानों की तीन तरफ लगभग चार फीट ऊंची दीवार थी और ऊपर कोई छत नहीं थी। दुकानों के आसपास तथा पीछे की ओर चलने के लिए रास्ते और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था रखी गई थी। योजना का उद्देश्य यह था कि व्यापारी दुकान में अपना सामान रखें और निर्धारित समय में कारोबार संचालित करें।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय के साथ बड़े कारोबारियों ने छोटे व्यापारियों की दुकानें अवैध रूप से अपने कब्जे में ले लीं और चलने के रास्तों तथा पार्किंग की जगहों को घेरकर फर्नीचर शोरूम खड़े कर दिए। अवैध निर्माणों के कारण कई स्थानों पर बिजली के खंभे तक दुकानों और शेड के भीतर आ गए हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
एमसीडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यहां संचालित अधिकांश फर्नीचर शोरूम नियमों के अनुरूप नहीं हैं। जिन दुकानों को विशेष उद्देश्य से आवंटित किया गया था, उनमें केवल वही गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। न तो उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को बेचा जा सकता है और न ही उनकी मूल संरचना में इस प्रकार का बदलाव किया जा सकता है। मार्केट में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है।
फर्नीचर शोरूम हो रहे संचालित
सूत्रों के मुताबिक, यहां फर्नीचर बेचने वाले कई कारोबारी ग्राहकों को ऐसी रसीदें देते हैं, जिन पर शास्त्री पार्क के बजाय जगतपुरी, कृष्णा नगर या गीता कॉलोनी जैसे अन्य क्षेत्रों के पते दर्ज होते हैं। इससे कारोबार की पारदर्शिता और वैधता पर भी सवाल उठते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की ओर जहां बड़े-बड़े फर्नीचर शोरूम संचालित हो रहे हैं, वहीं उनके पीछे फर्नीचर बनाने की अवैध कारखाने भी चल रहे हैं।
इन कारखानों को भी कथित रूप से पार्किंग और आवागमन के लिए छोड़ी गई जगहों पर बनाया गया है। कारखानों के बीच से बिजली के पोल गुजरते दिखाई देते हैं, जबकि वहां भारी मात्रा में सूखी लकड़ी, प्लाई बोर्ड, थिनर, सॉल्यूशन, स्पिरिट और अन्य ज्वलनशील पदार्थ रखे जाते हैं। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि कारखानों में काम करने वाले कई श्रमिक रात में भी वहीं ठहरते हैं और सुबह-शाम खाना बनाते हैं।
जबकि मूल योजना के अनुसार, यह परिसर केवल व्यापारिक गतिविधियों के लिए सुबह से शाम तक के लिए निर्धारित था, न कि आवासीय उपयोग के लिए। ज्वलनशील पदार्थों के बीच खुले में आग जलाकर खाना बनाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बीते वर्षों में यहां तीन बड़ी आग लग चुकी है और 22 मई की भीषण आग भी ऐसी ही लापरवाहियों का परिणाम हो सकती है। आग की घटना के बाद जिस तेजी से दोबारा अवैध निर्माण शुरू हुआ है, उसने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में फिर कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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