जैन संतों की धार्मिक सामग्री हटाने पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मेटा को लिखा पत्र

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Delhi Minorities Commission Wrote A Letter To Meta : दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने सोशल मीडिया मंचों पर जैन धर्म से जुड़े संतों की तस्वीरों, वीडियो और धार्मिक सामग्री को कथित रूप से हटाए जाने तथा उन्हें अनुचित श्रेणी में रखने के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने मेटा प्लेटफॉर्म्स की एक अधिकारी को पत्र लिखकर इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि दिगंबर जैन मुनि पूर्ण त्याग, अहिंसा और आत्म-साधना का जीवन जीते हैं तथा उनका स्वरूप जैन धर्म की…

Delhi Minorities Commission Wrote A Letter To Meta : दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने सोशल मीडिया मंचों पर जैन धर्म से जुड़े संतों की तस्वीरों, वीडियो और धार्मिक सामग्री को कथित रूप से हटाए जाने तथा उन्हें अनुचित श्रेणी में रखने के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने मेटा प्लेटफॉर्म्स की एक अधिकारी को पत्र लिखकर इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि दिगंबर जैन मुनि पूर्ण त्याग, अहिंसा और आत्म-साधना का जीवन जीते हैं तथा उनका स्वरूप जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।

आयोग का कहना है कि इस धार्मिक स्वरूप को अश्लीलता की श्रेणी में रखना या ऐसी सामग्री को हटाना करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। आयोग ने सोशल मीडिया कंपनियों से धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नीति बनाने, जैन संतों के धार्मिक स्वरूप को अश्लीलता की श्रेणी से अलग रखने तथा डिजिटल अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही ऐसी पक्षपातपूर्ण सेंसरशिप के खिलाफ जिम्मेदार तकनीकी कंपनियों से संवाद कर सुधारात्मक कदम उठाने, पोस्ट हटाने से पहले संदर्भ की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने और अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी आग्रह किया गया है। आयोग ने विश्वास जताया कि संबंधित मंच भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का सम्मान करते हुए इस संवेदनशील विषय पर सकारात्मक और संतुलित कार्रवाई करेंगे।

दिल्ली में पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा, इसे लागू करने की जरूरत : कुलदीप सिंह

वहीं गुरुवार को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य कुलदीप सिंह ने कहा कि दिल्ली में पंजाबी को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में राजधानी में जहां-जहां भी सार्वजनिक साइन बोर्ड लगाए जाते हैं, वहां हिंदी के बाद अंग्रेजी के बजाय पंजाबी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग इस दिशा में गंभीरता से प्रयास करेगा। कुलदीप सिंह ने कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को आने वाली समस्याओं पर भी आयोग विशेष ध्यान देगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के संकल्प को धरातल पर उतार रही है। आयोग के सदस्य केवल पदाधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अल्पसंख्यक समाज के हितों के लिए कार्य करेंगे। इस अवसर पर इंद्रलोक श्री सिंह सभा गुरुद्वारा के प्रधान दर्शन सिंह चड्ढा, सिख प्रकोष्ठ के जगदीप सिंह कोहली सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

Sumant Chaudhary