Health News : दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) को लेकर चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस के एक जवान की महज 3 साल 11 महीने की बच्ची की एच1एन1 संक्रमण के बाद मौत हो गई। बच्ची का इलाज बीएलके अस्पताल में चल रहा था। माइक्रोबायोलॉजी जांच में इन्फ्लूएंजा ए और एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। अस्पताल के मुताबिक, इलाज के दौरान बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती गई और 5 अगस्त की सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर उसकी मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि तीन दिन पहले ही बच्ची की बड़ी बहन की भी मौत हुई थी और उसमें भी इसी तरह के लक्षण थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि उसकी मौत भी संभवतः स्वाइन फ्लू से ही हुई है। हालांकि अस्पताल ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
एमआरआई में दिमाग के कई हिस्सों में संक्रमण
परिजनों के मुताबिक, सोनीपत निवासी दिल्ली पुलिसकर्मी की बच्ची को गंभीर हालत में 3 अगस्त की सुबह अस्पताल लाया गया था। 3 अगस्त को कराए गए ब्रेन एमआरआई में दिमाग के कई हिस्सों में गंभीर संक्रमण और सूजन दिखाई दी। रिपोर्ट में एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलाइटिस जैसी गंभीर स्थिति की आशंका जताई गई। इसके बाद 4 अगस्त को माइक्रोबायोलॉजी जांच में एच1एन1 और इन्फ्लूएंजा ए की पुष्टि हुई। बीएलके अस्पताल के अनुसार, बच्ची को बचाने के लिए मल्टी-स्पेशलिटी टीम ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत मामले की सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को दे दी है।
अस्पताल ने स्वाइन फ्लू से मृत्यु की पुष्टि की
बीएलके मैक्स हॉस्पिटल के प्रवक्ता के अनुसार, 3 साल 11 महीने की बच्ची को 3 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9 बजे बेहद गंभीर हालत में इमरजेंसी विभाग लाया गया था। जांच में इन्फ्लूएंजा-ए (एच1एन1) संक्रमण की पुष्टि हुई। ब्रेन एमआरआई में एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी (एएनईसी) के संकेत मिले, जो एक दुर्लभ और जानलेवा न्यूरोलॉजिकल जटिलता है और संभवतः एच1एन1 संक्रमण से जुड़ी थी। मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने गहन उपचार और एग्रेसिव सपोर्टिव केयर दी, लेकिन बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती गई। 5 अगस्त 2026 को सुबह 5:10 बजे उसकी मौत हो गई। मामले की सूचना निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत संबंधित जन स्वास्थ्य अधिकारियों को दे दी गई।
बच्चों में ज्यादा संक्रमण, लेकिन पैनिक की जरूरत नहीं
एम्स दिल्ली के पीडियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. प्रबुद्ध गोयल के मुताबिक, सामान्य फ्लू अक्सर 3-4 दिन में ठीक हो जाता है, जबकि स्वाइन फ्लू का असर ज्यादा समय तक रह सकता है। मौजूदा मौसम में गर्मी और उमस वायरस के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकती हैं। जुलाई में स्कूल खुलने के बाद बच्चों के बीच संक्रमण तेजी से फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉ. गोयल के अनुसार स्वाइन फ्लू में बुखार, नाक बहना या बंद होना, सर्दी-खांसी, सिरदर्द, थकान, पेट दर्द और कभी-कभी उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर संक्रमण में निमोनिया या दिमाग पर असर जैसी जटिलताएं जानलेवा हो सकती हैं।
दिल्ली में पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े आंकड़े
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 2025 में 229 मामले, 2024 में 3151 मामले और 2019 में 3627 मामले व 31 मौतें दर्ज की गई थीं। डॉक्टरों का कहना है कि लक्षण दिखने पर खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य जोखिम वाले मरीजों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।



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