दिल्ली में बदमाशों के कदम रखते नजदीकी थाने में बजेगा अलार्म, तकनीक से हाईटेक होगी दिल्ली पुलिस, सी-डॉट के साथ बड़ा समझौता

Summary :

Delhi Police C-DOT Agreement 2026: राजधानी में पुलिसिंग को तकनीक आधारित और अधिक मजबूत बनाने के लिए दिल्ली पुलिस  ने  सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस साझेदारी के जरिए पुलिस की जांच, निगरानी, संचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते के तहत सी-डॉट द्वारा विकसित कई अत्याधुनिक तकनीकी समाधान दिल्ली पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) प्रमुख है, जिसकी मदद से संदिग्धों, लापता लोगों और आदतन अपराधियों की पहचान तेजी से की जा सकेगी। यह सिस्टम भीड़भाड़…

Delhi Police C-DOT Agreement 2026: राजधानी में पुलिसिंग को तकनीक आधारित और अधिक मजबूत बनाने के लिए दिल्ली पुलिस  ने  सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस साझेदारी के जरिए पुलिस की जांच, निगरानी, संचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते के तहत सी-डॉट द्वारा विकसित कई अत्याधुनिक तकनीकी समाधान दिल्ली पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) प्रमुख है, जिसकी मदद से संदिग्धों, लापता लोगों और आदतन अपराधियों की पहचान तेजी से की जा सकेगी।

यह सिस्टम भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी और कानून-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान काफी मददगार साबित होगा। इस मौके पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा और सी-डॉट के सीईओ राज कुमार उपाध्याय ने अधिकारियों के साथ मिलकर पुलिसिंग की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए स्वदेशी और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी आधारित सॉल्यूशन लागू करने पर जोर दिया। इस दौरान स्पेशल पुलिस कमिश्नर (क्राइम) देवेश चंद्र श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।

वीडियो कॉल और डेटा शेयरिंग आसान

इसके अलावा ‘संवाद’ नाम का यूनिफाइड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म पुलिस के विभिन्न यूनिट्स और जिलों के बीच सुरक्षित बातचीत, वीडियो कॉल और डेटा शेयरिंग को आसान बनाएगा। वहीं संवाद प्राइम’ संवेदनशील सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए विशेष रूप से वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि ‘सी-डॉट मिट’ के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को और सुरक्षित बनाया जाएगा, जिससे मीटिंग, ब्रीफिंग और ट्रेनिंग सत्र बेहतर तरीके से आयोजित किए जा सकेंगे। वहीं ‘ मिशन क्रिटिकल सर्विस (एमसीएक्स)’ बड़े आयोजनों, आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की स्थिति में फील्ड में मौजूद पुलिसकर्मियों के बीच रियल-टाइम समन्वय को मजबूत करेगा।

फर्जी उपस्थिति पर लगेगी रोक

प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए फेस रिकग्निशन आधारित अटेंडेंस सिस्टम भी लागू किया जाएगा, जिससे फर्जी उपस्थिति पर रोक लगेगी। इसके साथ ही ‘सेल प्रसारण प्रणाली’ के जरिए लोगों को ट्रैफिक अलर्ट, आपातकालीन चेतावनी और अन्य जरूरी सूचनाएं सीधे मोबाइल फोन पर भेजी जा सकेंगी। साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘ट्रिनेत्रा सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (एसओसी)’ जैसी एआई आधारित प्रणाली लागू की जाएगी, जो पुलिस के आईटी नेटवर्क पर नजर रखते हुए संभावित साइबर खतरों का समय रहते पता लगाएगी।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।