दिल्ली पुलिस : सड़क, सुरक्षा-संचार को तवज्जो

Summary :

दिल्ली पुलिस को मिले बजट में बढ़ोतरी के बाद यातायात में सुधार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। पुलिस को रेवेन्यू सेक्शन में सबसे अधिक बढ़ाकर बजट दिया गया है।

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस को मिले बजट में बढ़ोतरी के बाद यातायात में सुधार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। पुलिस को रेवेन्यू सेक्शन में सबसे अधिक बढ़ाकर बजट दिया गया है, जिसको प्रशासनिक काम के अलावा सड़क सुरक्षा, यातायात विकास और कम्यूनिकेशन के हिसाब से खर्च किया जाएगा। बजट के बारे में सूत्रों ने बताया कि पुलिस के लिहाज से सबसे अधिक जरूरी प्रोजेक्ट इन्हीं यूनिटों में फंसे हुए हैं, जिनमें पुलिस को अधिक खर्च की जरूरत आएगी।

कम्यूनिकेशन यूनिट के पास कई प्रोजेक्ट लंबित हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण नेशनल इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (एनईआरएस) को लागू करना है। बताया जा रहा है कि सिर्फ एनईआरएस को लागू करने में पुलिस को बहुत अधिक खर्च की जरूरत होगी, क्योंकि इसके लिए पुलिस को कंट्रोल रूम में फोन लाइन को बढ़ाना होगा, तो वहीं अन्य हेल्पलाइन नंबरों के साथ पुलिस के आगामी 112 को इंटीग्रेट करना भी आर्थिक आधार पर चुनौती से कम नहीं होगा।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय बजट में पुलिस को सबसे अधिक रेवेन्यू सेक्शन में भी उछाल मिला है, जिसमें 540 करोड़ रुपए से अधिक रुपए बढ़कर मिले हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में पुलिस के पास खर्च करने को 6791.60 करोड़ मिले थे, जिसमें से अब तक प्रशासनिक काम में ही 6745.11 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, जबकि सड़क सुरक्षा सेल ने 45.29 करोड़ रुपए व यातायात व कम्यूनिकेशन के विकास में 3.20 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। हालांकि आगामी वर्ष के लिए पुलिस को 7334.28 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं।

माना जा रहा है कि प्रशासनिक काम में लगभग बीते वर्ष जितना भी खर्च आएगा, जिसके कारण पुलिस बढ़े हुए 542.60 करोड़ रुपए को रोड सेफ्टी-कम्यूनिकेशन में लगा सकेगी। कैपिटल सेक्शन के तहत मौजूदा वर्ष में मिले 154.68 करोड़ रुपए खर्च होने थे। इस सेक्शन में यातायात के लिहाज से इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) भी महत्वपूर्ण योजना है, जिसके तहत मौजूदा वर्ष में सिर्फ पांच करोड़ रुपए की खर्च हो सके हैं।

इसके अलावा क्षमता बढ़ाने व सिग्नल-ब्लिंकर्स लगाने में पुलिस ने करीबन सात करोड़ रुपए खर्च किए हैं तो गाड़ियों के ऊपर पुलिस का 65.50 करोड़ रुपए का खर्च आया। हालांकि आगामी वर्ष के 162.63 करोड़ रुपए मिले हैं, जिसका हिस्सा आईटीएमएस व सिग्नल-ब्लिंकर्स में खर्च किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि गाड़ियों के लिहाज से भी पुलिस के पास पीसीआर की कमी है।

Desk Team