Delhi Public Transport Promotion: पेट्रोल-डीजल की बचत करने और ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को अपनाते हुए दिल्ली सरकार ने विभागीय कामकाज के लिए वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है। बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस विशेष परिस्थितियों में सरकार के सभी कैबिनेट सहयोगी, भारतीय जनता पार्टी के सभी विधायक, जनप्रतिनिधि, दिल्ली सरकार के सभी विभागों व अधिकारियों ने भी आवश्यकता के अनुरूप न्यूनतम वाहनों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। वे कारपूल और सार्वजनिक परिवहन को भी प्राथमिकता देंगे। मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों से भी ईंधन बचाने के लिए अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के साथ-साथ कारपूल की भी अपील की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी दिल्ली में मेट्रो व सार्वजनिक बसों का पर्याप्त बेड़ा है। इनकी पहुंच एनसीआर तक भी है। अब इस विशेष परिस्थितियों में अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और डीटीसी बसों का उपयोग करेंगे तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आएगी। जन-भागीदारी की ताकत ही किसी भी बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य को सफल बनाती है। कोरोना काल में भी देश ने अनुशासन, सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल प्रस्तुत की थी। एक बार फिर ऐसा समय है जब प्रत्येक नागरिक का छोटा प्रयास भी देशहित में बड़ा योगदान बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, कार्यालय जाने, बाजार आने-जाने या दैनिक यात्रा के दौरान सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और कार पूलिंग को अपनी आदत बनाएं।
दिल्ली-एनसीआर की जीवनरेखा बन चुकी है मेट्रो सेवाः सीएम रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो सेवा आज दिल्ली-एनसीआर की जीवनरेखा बन चुकी है। आज मेट्रो आज 416 किलोमीटर लंबे नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। दिल्ली मेट्रो वर्तमान में 303 स्टेशनों और 343 ट्रेनों के साथ प्रतिदिन 4,500 से अधिक फेरे संचालित कर रही है और प्रतिदिन दिल्ली सहित नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और बहादुरगढ़ सहित क्षेत्रों के 65 लाख से अधिक यात्रियों को सुविधा प्रदान कर रही है। दिल्ली मेट्रो की विभिन्न लाइनें राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक, शैक्षणिक, आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ती हैं। मेट्रो के विस्तार से यात्रा का समय कम हुआ है, प्रदूषण में कमी आई है और लोगों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध हुआ है। सरकार लगातार मेट्रो सेवा के बेहतर समन्वय, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी तथा पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
यात्रियों के लिए हैं पर्याप्त बसेंः रेखा गुप्ता
रेखा गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। वर्तमान में दिल्ली में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की कुल 6,300 सक्रिय बसों का बेड़ा संचालित हो रहा है, जिनमें 4,538 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इनमें 9 मीटर श्रेणी की 1,593 देवी बसें, 12 मीटर श्रेणी की 2,845 इलेक्ट्रिक बसें तथा 100 फीडर बसें शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर 7,500 करना है, जबकि वर्ष 2028 तक राजधानी में 14,000 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। बसों की वर्तमान स्थिति बताती है कि यात्रियों के लिए पर्याप्त बसें हैं।
मुख्यमंत्री की दिल्लीवासियों से अपील, ईंधन बचत को बनाएं जन आंदोलन
दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि एनसीआर क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। दिल्ली-रोहतक, सोनीपत, पानीपत, धारूहेड़ा और बड़ौत सहित कई मार्गों पर भी डीटीसी की ई बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सुगम, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल यात्रा सुविधा मिल रही है। दिल्ली की सीएम ने कहा कि ईंधन बचाना केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सामूहिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे सार्वजनिक परिवहन को अपनी प्राथमिकता बनाकर देशहित के इस प्रयास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।


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