Delhi : दिल्ली के निजी स्कूलों ने यदि किसी प्रकार का मनमाना शुल्क बढ़ाकर अभिभावकों पर बोझ डाला तो प्राइवेट स्कूलों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है। इतना ही नहीं यदि स्कूल मैनेजमेंट इस प्रक्रिया को प्रभावित करने, उसमें हस्तक्षेप करने व नियमों का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो सरकार स्कूल के मैनेजमेंट का अधिग्रहण भी कर सकती है।
दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति का गठन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई, 2026 तक शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए अपनी स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति का गठन करना अनिवार्य होगा।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह निर्णय दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के लागू होने के बाद लिया गया है। इस ऐतिहासिक कानून का उद्देश्य दिल्ली में विद्यालयी शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह एवं न्यायसंगत बनाना है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को अभिभावकों पर मनमानी शुल्क वृद्धि या छिपे हुए शुल्कों के माध्यम से अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी।
इस अंतरिम अवधि में यदि किसी विद्यालय द्वारा अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है तो वह कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन होगा व आवश्यकतानुसार अभिभावकों को वापस किया जाएगा या समायोजित किया जाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया अंतरिम आदेशों के अनुपालन में सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि नई शुल्क संरचना के विधिवत परीक्षण व अनुमोदन तक वे केवल शैक्षणिक सत्र 2025–26 के अनुरूप ही शुल्क वसूलेंगे।
ड्रा से होगा कमेटी के सदस्यों का चुनाव
पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस समिति में पांच सदस्य होंगे। इनमें पांच अभिभावक प्रतिनिधियों और तीन शिक्षक प्रतिनिधियों का चयन सार्वजनिक एवं वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ लॉटरी (ड्रा ऑफ लॉट्स) के माध्यम से किया जाएगा। विद्यालयों को लॉटरी आयोजित करने से कम-से-कम सात दिन पूर्व सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी व पूरी प्रक्रिया की निगरानी सरकार द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक करेंगे।
समिति के सामने प्रस्तुत करने होंगे तीन वर्षों के शुल्क प्रस्ताव
जारी आदेश के अनुसार, स्कूल मैनेजमेंट को 31 जुलाई, 2026 तक आगामी तीन वर्षों के शुल्क प्रस्ताव समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। इन प्रस्तावों के साथ पिछले तीन वर्षों के चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित ऑडिटेड वित्तीय विवरण संलग्न करना अनिवार्य होगा। बिना ऑडिट अथवा स्वयं प्रमाणित दस्तावेजों को तत्काल अस्वीकार कर दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें : दिल्ली की बिजली कंपनियों का होगा कैग ऑडिट, आशीष सूद बोले – “जवाबदेही की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम”


Download Android App
Download iOS App




