45 लाख लोगों को मिलेगा मालिकाना हक
1511 कॉलोनियों का कायाकल्प
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 1731 में से 1511 कॉलोनियों को नियमित किया गया है। जिससे लोगों को अपने घरों में निर्माण, मरम्मत और पुनर्विकास की पूरी सुविधा मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि 24 अप्रैल से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें 7 दिन में जीआईएस सर्वे, 15 दिन में आवेदन की कमियों को दूर करने और 45 दिन में कन्वेयंस डीड जारी करने की समयसीमा तय की गई है।
छोटी दुकानों और निर्माण कार्यों को मिली हरी झंडी
सरकार ने साफ किया है कि अब लेआउट प्लान की मंजूरी न होने के कारण काम नहीं रुकेगा। सभी प्लॉट और भवनों का उपयोग आवासीय माना जाएगा और छोटी दुकानों को भी शर्तों के साथ मान्यता दी जाएगी। एमसीडी और अन्य एजेंसियां नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगी और बुनियादी सुविधाओं के विकास में मदद करेंगी। अब तक करीब 40 हजार संपत्ति दस्तावेज जारी हो चुके हैं, लेकिन लेआउट प्लान की बाधा के कारण लोगों को निर्माण की अनुमति नहीं मिल रही थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
मेट्रो कॉरिडोर के पास बनेंगे सस्ते घर
सरकार ने नई टीओडी नीति भी किया लागू दूसरी ओर, सरकार ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति को भी लागू कर दिया है, जिससे मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर सस्ते घर बन सकेंगे। इस नीति के तहत मेट्रो स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में उच्च घनत्व और मिश्रित उपयोग वाला विकास किया जाएगा। इससे करीब 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास का रास्ता खुलेगा।
एफएआर में बढ़ोतरी
नई नीति के तहत पहले बाहर रखे गए करीब 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को भी शामिल किया गया है, जिससे अधिक जमीन पर आवास निर्माण संभव होगा। छोटे प्लॉट (2000 वर्गमीटर) पर भी विकास की अनुमति दी गई है और अधिकतम एफएआर 500 तक रखा गया है। इसमें 65 फीसदी हिस्सा अनिवार्य रूप से आवासीय होगा, जिसमें 100 वर्गमीटर तक के सस्ते घर बनाए जाएंगे। बाकी 35 फीसदी क्षेत्र में व्यावसायिक और अन्य सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। साथ ही मेट्रो स्टेशनों से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए पैदल मार्ग और आधुनिक सुविधाएं भी विकसित होंगी।
प्रदूषण और ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति
सरकार का कहना है कि नई टीओडी नीति से गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ते घर मिलेंगे, मेट्रो उपयोग बढ़ेगा और शहर में ट्रैफिक व प्रदूषण कम होगा। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए निर्माण की मंजूरी आसान और तेज हो जाएगी। इन दोनों फैसलों से साफ है कि अब दिल्ली में न सिर्फ लोगों को अपने घरों पर पूरा अधिकार मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में सस्ते और बेहतर आवास के नए अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।
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