Delhi : नशे के सौदागरों ने अब अपने कारोबार का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। गलियों में खुलेआम सौदा करने के बजाय अब व्हाट्सएप पर एक मैसेज आते ही चरस की होम डिलीवरी की जा रही थी। ऑर्डर मोबाइल पर लिया जाता, ऑनलाइन पेमेंट होती और कुछ ही देर में ऑटो या बाइक टैक्सी के जरिए नशा ग्राहक तक पहुंचा दिया जाता। इस हाईटेक ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दक्षिण जिला स्पेशल स्टाफ ने नेपाल के तीन नागरिकों को गिरफ्तार किया हैं।
आरोपियों की पहचान नेपाल निवासी ज्योति पुन मगर (50), भरत थापा (32) और गोविंद बुढ़ा (32) के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 8.598 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता की चरस बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये आंकी गई है।
डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि इस कार्रवाई को एसीपी (ऑपरेशंस) रितु राज की निगरानी और स्पेशल स्टाफ प्रभारी इंस्पेक्टर अनुज कुमार के नेतृत्व में टीम ने की हैं। गुप्त सूचना मिलने के बाद स्पेशल स्टाफ ने उनके ठिकाने पर छापा मारकर सभी को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से कुल 8.598 किलोग्राम चरस बरामद हुई, जिसमें सबसे अधिक 5.566 किलोग्राम चरस ज्योति पुन मगर के पास से मिली।
भारत-नेपाल सीमा के सोनौली बॉर्डर से मंगवाता था चरस
जांच में सामने आया कि गिरोह भारत-नेपाल सीमा के सोनौली बॉर्डर से चरस मंगवाता था। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में ग्राहकों से व्हाट्सएप्प के जरिए संपर्क किया जाता था। ऑटो रिक्शा या बाइक टैक्सी के जरिए ड्रग्स की डिलीवरी ऑर्डर मिलने पर आरोपी डिजिटल बैंकिंग माध्यमों से भुगतान लेते और ऑटो रिक्शा या बाइक टैक्सी के जरिए नशे की डिलीवरी कर देते थे।
पुलिस के मुताबिक, हर सौदे के बाद आरोपी व्हाट्सएप्प चैट और कॉल रिकॉर्ड तुरंत डिलीट कर देते थे, ताकि पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। पूछताछ में यह भी पता चला कि ज्योति पुन मगर नेपाल में बैठे सप्लायर से चरस मंगवाने का काम करता था, जबकि भरत थापा और गोविंद बुढ़ा दिल्ली में इसकी सप्लाई संभालते थे। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क, नेपाल में बैठे सप्लायर और दिल्ली-एनसीआर में जुड़े अन्य तस्करों तक पहुंचा जा सके।
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