धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने तोड़ी NDA सरकार में मंत्री इस्तीफा नहीं देते वाली धारणा

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Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। पिछले 12 वर्षों के दौरान मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे अपेक्षाकृत कम देखने को मिले हैं। अधिकांश मामलों में इस्तीफे राजनीतिक जिम्मेदारियों, कैबिनेट फेरबदल, स्वास्थ्य कारणों या संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की वजह से हुए, जबकि विवादों के चलते पद छोड़ने के उदाहरण बेहद सीमित रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना बयान भी सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा…

Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। पिछले 12 वर्षों के दौरान मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे अपेक्षाकृत कम देखने को मिले हैं। अधिकांश मामलों में इस्तीफे राजनीतिक जिम्मेदारियों, कैबिनेट फेरबदल, स्वास्थ्य कारणों या संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की वजह से हुए, जबकि विवादों के चलते पद छोड़ने के उदाहरण बेहद सीमित रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना बयान भी सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनडीए सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस बयान का हवाला देते हुए प्रतिक्रिया दी है।

आपको बता दें कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (2014-19) में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने गोवा के मुख्यमंत्री बनने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल छोड़ा था। एम. वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दिया, जबकि नजमा हेपतुल्ला ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से अलग होने का फैसला किया। सर्वानंद सोनोवाल ने असम का मुख्यमंत्री बनने के लिए पद छोड़ा था। वहीं, विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी, हालांकि बाद में कैबिनेट फेरबदल में उनका मंत्रालय बदल दिया गया।

जब एक साथ 12 मंत्रियों ने पद छोड़ा

दूसरे कार्यकाल (2019-24) में सबसे बड़ा बदलाव जुलाई 2021 के कैबिनेट विस्तार के दौरान देखने को मिला, जब एक साथ 12 मंत्रियों ने पद छोड़ा। इनमें डॉ. हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, संतोष गंगवार और बाबुल सुप्रियो प्रमुख थे। इसके अलावा हरसिमरत कौर बादल ने कृषि कानूनों के विरोध में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया, जबकि अरविंद सावंत ने महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद पद छोड़ा। बाद में पशुपति कुमार पारस ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे चर्चित घटनाओं में माना जा रहा है। इससे पहले रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने एक बार फिर मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफों के इतिहास और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Sumant Chaudhary