Jantar Mantar Protest : दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर महराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा 18वीं शताब्दी में बनाई गई खगोल वेधशाला है, लेकिन वर्तमान और बीते दशकों की बात करें तो दिल्ली का यह लैंडमार्क आज भारत के लोकतंत्र का ‘प्रेशर कुकर’ बन चुका है। जंतर-मंतर को जाने वाली सड़कों पर गत महीने भर से अधिक समय से जेन-जी अपनी मांगों को लेकर बैठे और अपनी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा लेकर ही आंदोलन खत्म किया। बता दें कि जंतर-मंतर पर बीते कई वर्षों से ऐतिहासिक प्रदर्शन होते आ रहे हैं, जिन्होंने देश की राजनीति की दिशा बदली है।
दिल्ली में हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन
जेपी आंदोलन- (1975)
दिल्ली में जेपी आंदोलन (जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में ‘संपूर्ण क्रांति’) का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक पड़ाव 25 जून 1975 को रामलीला मैदान में हुई विशाल रैली थी।
मजदूर व किसान अधिकार रैलियां (1980-90)
का दशक न्यूनतम मजदूरी, भूमि अधिग्रहण और ग्रामीण संकट वामपंथी और समाजवादी दलों के नेतृत्व में मजदूर संगठनों ने पहली बार दिल्ली को अपनी ताकत का अहसास कराया था।
मंडल आयोग विरोध-प्रदर्शन (1990)
मंडल आयोग के विरोध-प्रदर्शन 1990 में तब शुरू हुए जब प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने अन्य पिछड़ा वर्गों (OBCs) के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश को लागू करने की घोषणा की। मोरारजी देसाई सरकार के तहत 1979 में गठित मंडल आयोग को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने और सरकारी नौकरियों में उनके प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने के उपाय सुझाने का काम सौंपा गया था।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन – (1994-2000)
अलग पहाड़ी राज्य की मांग, पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं और बुद्धिजीवियों ने जंतर-मंतर पर लंबा संघर्ष किया, जिसके परिणामस्वरूप सन 2000 में अलग उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ।
जस्टिस फॉर जेसिका लाल- (2006)
न्याय में देरी और वीआईपी कल्चर के खिलाफ मीडिया और आम जनता का ऐसा दबाव बना कि निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को उम्रकैद की सजा दी।
इंडिया अगेंस्ट करप्शन (अन्ना आंदोलन)- (2011)
देश से भ्रष्टाचार खत्म करने और मजबूत लोकपाल कानून, इस आंदोलन ने देश की यूपीए शासित केंद्र सरकार की चूलें हिला दीं। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह जनसैलाब रामलीला मैदान तक गया, जिसने देश की राजनीतिक पार्टियों का समीकरण ही बदल दिया।
निर्भया न्याय आंदोलन – (दिसंबर 2012- जनवरी 2013)
महिला सुरक्षा और कठोर बलात्कार विरोधी कानून, हालांकि मुख्य प्रदर्शन इंडिया गेट और रायसीना हिल्स विजय चौक पर था, लेकिन जंतर-मंतर महिलाओं और युवाओं के गुस्से का स्थायी केंद्र बना रहा, जिसके बाद क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट आया।
किसानों का विरोध-प्रदर्शन (2020-21)
यह आंदोलन भारत के सबसे लंबे और बड़े जन-आंदोलनों में से एक बन गया, जिसने खेती-किसानी की मुश्किलों और कृषि सुधारों की ओर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। किसानों का विरोध-प्रदर्शन 2020 में तब शुरू हुआ जब संसद ने कृषि से जुड़े तीन कानून पास किए।
पहलवानों का ऐतिहासिक धरना – (2023) कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप, देश के शीर्ष ओलंपिक और विश्व चैम्पियन पहलवानों (विनेश फोगट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया) ने महीनों जंतर-मंतर पर खुले आसमान के नीचे रातें बिताईं। जिसके बाद कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष को पद छोड़ना पड़ा।
सोनम वांगचुक और सीजेपी का पेपर लीक विरोध – (2026) शिक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक व भ्रष्टाचार के खिलाफ’जेन-जी’ युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में यह आधुनिक डिजिटल युग का सबसे बड़ा अनूठा छात्र आंदोलन बन गया। आंदोलन के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।



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