कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही जिला अदालतें, बढ़ रहा मुकदमों का बोझ

Summary :

Courts Grapple With Staff Shortages : दिल्ली की जिला अदालतों में कर्मचारियों की कमी के चलते आम लोगों की न्याय पाने की आस टूट रही है। जिला अदालतों में न्यायाधीशों का सहयोग करने वाले और फाइलों का निपटारा देखने वाले कर्मचारियों के करीब 20 फीसदी पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर अदालतों में लंबित पड़े करीब 17 लाख मुकदमों के निपटारे की रफ्तार पर पड़ रहा है। जिला एवं सत्र अदालत कर्मचारी कल्याण संघ ने लिखा पत्र जिला अदालतों में खाली पड़े पदों को लेकर जिला एवं सत्र अदालत कर्मचारी कल्याण संघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के…

Courts Grapple With Staff Shortages : दिल्ली की जिला अदालतों में कर्मचारियों की कमी के चलते आम लोगों की न्याय पाने की आस टूट रही है। जिला अदालतों में न्यायाधीशों का सहयोग करने वाले और फाइलों का निपटारा देखने वाले कर्मचारियों के करीब 20 फीसदी पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर अदालतों में लंबित पड़े करीब 17 लाख मुकदमों के निपटारे की रफ्तार पर पड़ रहा है।

जिला एवं सत्र अदालत कर्मचारी कल्याण संघ ने लिखा पत्र

जिला अदालतों में खाली पड़े पदों को लेकर जिला एवं सत्र अदालत कर्मचारी कल्याण संघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा है और कहा है कि जिला अदालतों में स्टाफ की कमी से व्यवस्थाएं चरमरा रही है। जिला एवं सत्र अदालत कर्मचारी कल्याण संघ के महासचिव अरुण यादव के मुताबिक सूचना के अधिकार से जुटाए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जिला अदालतों में कुल 8,575 स्वीकृत पदों में से 1,711 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर कोर्ट रूम में तैनात रहने वाले कर्मचारियों की कमी का पूरा दबाव मौजूदा कर्मचारियों पर आ रहा है। संघ ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि वर्ष 2012 के भर्ती नियमों के तहत तुरंत विभागीय परीक्षाएं कराई जाएं अथवा 17-18 साल से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों को सेक्शन 44, दिल्ली जिला न्यायालय कर्मचारी भर्ती नियम के अंतर्गत विशेष छूट देकर तुरंत पदोन्नत किया जाए और बाकी खाली पड़े पदों को सीधी भर्ती से जल्द भरा जाए।

20 सालों से अटका प्रमोशन

संघ के महासचिव अरुण यादव के मुताबिक कनिष्ठ न्यायिक सहायक (जेजेए) एवं न्यायिक सहायक (जेए ) के रूप में भर्ती हुए कर्मचारी पिछले 18-20 वर्षों से बिना किसी प्रमोशन के एक ही पद पर काम कर रहे हैं। विभागीय परीक्षाएं न कराए जाने के कारण उच्च पदों पर पदोन्नति नहीं हो पा रही है। जब तक ऊपर के पद नहीं भरेंगे, तब तक नीचे के कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं मिलेगा और नए पदों पर सीधी भर्ती का रास्ता भी बंद रहेगा।

काम के दबाव के चलते कर्मचारी ने की थी आत्महत्या

गौरतलब है कि साकेत कोर्ट में नौ जनवरी को अहलमद के पद पर काम करने वाले हरीश सिंह महार ने बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में ऑफिस के काम के दबाव को आत्महत्या का कारण बताया था। वह 60 फीसदी दिव्यांग थे और फाइलों व काम के अधिक दबाव से काफी परेशान थे।

एआईजेईसी ने भी किया समर्थन

वहीं, ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एम्प्लॉइज कॉन्फेडरेशन ने भी दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कर्मचारी संघ की मांगों का समर्थन किया है। एआईजेईसी के अध्यक्ष राजूभाई पी ब्रह्मभट्ट और महासचिव एच. ए. नागेश द्वारा लिखे पत्र में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए खाली पदों को तुरंत भरने, प्रमोशन वाले पदों पर सीधी भर्ती बंद करने, अतिरिक्त कैडर पद बनाने, और भारी काम के बोझ को देखते हुए जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट के नए कैडर पद बनाने की मांग की गई है।

खाली पड़े पद और लंबित मुकदमों की संख्या

स्वीकृत पद: 8,575

रिक्त पद: 1,711

वरिष्ठ न्यायिक सहायक (एसजेए)  : 277 पद

कनिष्ठ न्यायिक सहायक (जेजेए): 453 पद

स्टेनो और फील्ड कैडर: 448 पद

प्रशासनिक अधिकारी: 55 पद

लंबित मुकदमे: 16,85,890 (31 मई 2026 तक)

 

 

 

Sumant Chaudhary