डॉक्टरों ने इथियोपिया के एक युवक के शरीर में छह साल से स्पाइन के पास फंसी गोली निकाली

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Doctors save Ethiopian youth life : मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और जोखिम भरी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए छह वर्षों से रीढ़ (स्पाइन) के पास फंसी गोली को निकाल दिया। इथियोपिया के 20 वर्षीय मोहम्मद फैजल जामा के शरीर में यह गोली करीब छह साल पहले लगी थी और तब से वह लगातार दर्द, सुन्नपन, झुनझुनी और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। लगभग पांच घंटे चली इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और ऑपरेशन के अगले ही दिन वह चलने-फिरने लगे। डॉक्टरों के अनुसार,…

Doctors save Ethiopian youth life : मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और जोखिम भरी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए छह वर्षों से रीढ़ (स्पाइन) के पास फंसी गोली को निकाल दिया। इथियोपिया के 20 वर्षीय मोहम्मद फैजल जामा के शरीर में यह गोली करीब छह साल पहले लगी थी और तब से वह लगातार दर्द, सुन्नपन, झुनझुनी और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। लगभग पांच घंटे चली इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और ऑपरेशन के अगले ही दिन वह चलने-फिरने लगे।

डॉक्टरों के अनुसार, मोहम्मद फैजल जामा छह वर्ष पहले स्कूल से लौटते समय प्रदर्शनकारियों के बीच फंस गए थे। इसी दौरान चली गोली उनके कंधे से शरीर में प्रवेश कर चेस्ट कैविटी से होते हुए पसली और स्पाइन के बीच जाकर फंस गई। सौभाग्य से गोली स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचाए बिना रुक गई, लेकिन इसकी स्थिति बेहद संवेदनशील थी। इसके कारण उन्हें वर्षों तक लगातार दर्द, असामान्य सेंसेशन, सुन्नपन और झुनझुनी की समस्या बनी रही। साथ ही यह डर भी सताता रहा कि यदि गोली अपनी जगह से हिली तो स्पाइन या सीने के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

घटना के समय डॉक्टरों ने संभावित जोखिम को देखते हुए गोली को निकालने के बजाय वहीं छोड़ देना सुरक्षित समझा था। लेकिन समय के साथ मरीज की तकलीफ बढ़ती गई। बेहतर इलाज की तलाश में वह भारत पहुंचे और मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में विशेषज्ञों से परामर्श लिया।

गोली पसली और रीढ़ की हड्डी के नजदीकी हिस्से के बीच बेहद जटिल स्थिति में फंसी थी

जांच के दौरान अस्पताल के थोरैसिक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. कामरान अली और उनकी टीम ने विस्तृत क्लीनिकल तथा रेडियोलॉजिकल परीक्षण किए। इनमें पता चला कि गोली पसली और रीढ़ की हड्डी के नजदीकी हिस्से के बीच बेहद जटिल स्थिति में फंसी हुई थी। मरीज के लगातार बढ़ते लक्षणों और भविष्य के जोखिम को देखते हुए सर्जिकल टीम ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉ. कामरान अली ने बताया कि गोली स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान नहीं पहुंचा रही थी, लेकिन उसकी स्थिति बेहद संवेदनशील थी।

इसलिए ऑपरेशन की विस्तृत योजना बनाई गई। सर्जरी के दौरान प्रभावित पसली के पिछले हिस्से और रीढ़ की हड्डी के समीप के कुछ हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाकर गोली तक पहुंच बनाई गई, ताकि आसपास की नसों और महत्वपूर्ण अंगों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। उन्होंने कहा कि कई मामलों में शरीर में फंसी गोली को वर्षों तक नहीं निकाला जाता, यदि उसे निकालने का जोखिम अधिक हो। ऐसे मामलों में सर्जरी का निर्णय गोली की स्थिति, मरीज के लक्षण, नसों और महत्वपूर्ण अंगों से उसकी दूरी तथा संभावित जटिलताओं को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

करीब पांच घंटे तक चली इस सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बेहतर रही

करीब पांच घंटे चली इस सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी उम्मीद से बेहतर रही। ऑपरेशन के अगले दिन ही वह चलने में सक्षम हो गए। उनकी तेजी से रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी शुरू की गई और लगातार सुधार के बाद चार दिन में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अस्पताल के अनुसार, यह सफलता थोरैसिक सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, रेडियोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और फिजियोथेरेपिस्ट सहित मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यह मामला आधुनिक सर्जिकल तकनीक, सटीक योजना और विशेषज्ञों की कुशलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

Sumant Chaudhary