IVF Day : अंतरराष्ट्रीय आईवीएफ दिवस ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब इनफर्टिलिटी से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भधारण केवल स्पर्म काउंट या एक-दो सामान्य जांचों पर निर्भर नहीं करता। कई बार सभी शुरुआती रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता, क्योंकि ऐसी कई महत्वपूर्ण समस्याएं होती हैं, जिनका पता सामान्य जांच में नहीं चलता।
इस बारे में बात करते हुए प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वैशाली शर्मा ने कहा कि सीमन एनालिसिस में केवल स्पर्म काउंट और मोटिलिटी ही नहीं, बल्कि स्पर्म मॉर्फोलॉजी यानी स्पर्म की बनावट और आकार का मूल्यांकन भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कुछ स्पर्म के दो हेड, बहुत छोटे या विभाजित हेड, दो टेल या असामान्य टेल जैसी खामियां हो सकती हैं, जिन्हें टेराटोजूस्पर्मिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में स्पर्म की एग को फर्टिलाइज करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। आईवीएफ, खासकर आईसीएसआई जैसी तकनीकों में सामान्य आकार और स्वस्थ संरचना वाले स्पर्म का चयन किया जाता है, इसलिए स्पर्म मॉर्फोलॉजी की जांच का महत्व और बढ़ जाता है।
वहीं फर्टिलिटी विशेषज्ञ और शी दिल्ली की डॉ. कृति तिवारी कहती हैं कि कई दंपती यह सवाल लेकर आते हैं कि जब सभी रिपोर्ट सामान्य हैं, तो गर्भ क्यों नहीं ठहर रहा। उनके अनुसार गर्भधारण शरीर की बेहद जटिल प्रक्रिया है, जिसमें एग की गुणवत्ता, स्पर्म की कार्यक्षमता, भ्रूण का विकास और गर्भाशय में उसका सफल इम्प्लांटेशन-सभी की अहम भूमिका होती है। कई बार हार्मोन स्तर सामान्य होने पर भी एग क्वालिटी प्रभावित हो सकती है, फेलोपियन ट्यूब की कार्यक्षमता में सूक्ष्म गड़बड़ी हो सकती है या स्पर्म डीएनए में ऐसी समस्या हो सकती है, जो सामान्य जांच में सामने नहीं आती।
डॉ. वैशाली ने कहा कि तनाव, वायु प्रदूषण, धूम्रपान, तंबाकू, शराब, मोटापा और असंतुलित जीवनशैली खराब सीमन क्वालिटी से जुड़े प्रमुख कारण हैं। वहीं डॉ. कृति का कहना है कि यदि लंबे समय तक प्रयास के बावजूद गर्भधारण न हो, विशेषकर 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में, तो केवल सामान्य जांच पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ से विस्तृत जांच करानी चाहिए।



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