समर्थन मूल्य पर आज ड्राफ्ट

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इस चर्चा के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पहला ड्राफ्ट आएगा। इसके बाद नरेला और नजफगढ़ में किसानों के साथ इसकी चर्चा की जाएगी।

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए किसानों को मनाने की राह और कठिन कर दी। भाजपा अभी कांग्रेस द्वारा चले गए कर्जमाफी के चाल का काट ढूंढ ही रही थी कि सोमवार को दिल्ली सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर स्वामीनाथन आयोग को लागू करने की कवायद शुरू कर एक और मुश्किल खड़ी कर दी। हालांकि दिल्ली में इस आयोग की सिफारिशों को लागू होने में करीब छह से आठ महीने का समय लग सकता है, लेकिन मंगलवार को इसका पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया जाएगा।

इस ड्राफ्ट की खास बात यह होगी कि इसमें तेलंगाना और ओडिशा मॉडल को भी फॉलो किया जाएगा। सोमवार को सचिवालय में प्रेस वार्ता करते हुए दिल्ली सरकार के विकास मंत्री गोपाल राय ने बताया कि बीते चार दिसंबर को सरकार ने विभाग के अंदर ही तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी, जिसने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार के दिल्ली की कृषि और उत्पादन लागत का आकलन किया है। इस आकलन पर दिल्ली के कृषि विभाग के अधिकारी मंगलवार को उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार के लागत एवं मूल्य निर्धारण विभाग, एफसीआई, नेफेड और पूसा के वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करेंगे।

इस चर्चा के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पहला ड्राफ्ट आएगा। इसके बाद नरेला और नजफगढ़ में किसानों के साथ इसकी चर्चा की जाएगी। साथ ही ओडिशा समेत कुछ अन्य राज्यों के किसानों और अधिकारियों से इस पर चर्चा कर अंतिम ड्राफ्ट तय किया जाएगा। गोपाल राय की माने तो न्यूनतम समर्थन मूल्य केंद्र सरकार ही तय कर सकती है, लेकिन वह बार-बार इससे पीछे हटती जा रही है। इसलिए दिल्ली सरकार राजधानी के लिए एक मॉडल तैयार कर रही है।

इस दिशा में तेलंगाना और ओडिशा नया प्रयोग कर रहे हैं, इसलिए उनके प्रयोगों को भी समझा जा रहा है। बता दें कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए यूपीए सरकार ने 18 नवंबर 2004 को स्वामिनाथन आयोग का गठन किया था, जिसने चार अक्टूबर 2006 को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।

स्वामीनाथन आयोग से किसानों को होगा फायदा
बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार मंगलवार को जो पहला ड्राफ्ट पेश करेगी, उसमें समर्थन मूल्य स्वामीनाथन आयोग के डेढ़ गुणे के सिफारिशों से भी ज्यादा मगर दो गुणे से कम रखा जाएगा। विभाग का कहना है कि समर्थन मूल्य तय करने में मजदूरी, परिवहन व्यय, कटाई, छंटाई और सिंचाई जैसे कारक अहम होते हैं।

दिल्ली में यह ज्यादा होने की वजह से समर्थन मूल्य ज्यादा करना ही पड़ेगा। इसे लागू करने के समय पर उठ रहे सवालों पर राय ने खुल कर कहा कि हां वे चुनावी फायदे को देखते हुए इस समय प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं, लेकिन उनसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा। अगर केंद्र चाहे तो इसे लागू करके वह इसका फायदा ले ले।

परेशान हो रहे किसान
खेतों में सरसो तैयार हो चुकी है, अगले कुछ सप्ताह के बाद इनकी कटाई भी शुरू हो जाएगी। इस बार फसल भी बेहतर हुई लेकिन किसानों के चेहरों पर खुशी की जगह परेशानी है। किसानों का कहना है कि खरीदारी के लिए समय पर सरकारी एजेंसियां नहीं आती। पिछली बार भी एजेंसियां काफी देर से आई थी जिस कारण किसानों को अपनी सरसों आढ़तियों को बेचनी पड़ी।

उन्होंने किसानों को अपने हिसाब से सरसों का भुगतान किया जिस कारण किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। नजफगढ़ के किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4200 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हुआ था लेकिन समय पर घोषणा न होने के कारण किसानों ने औने-पौने दाम पर ही सरसों की ब्रिकी कर दी थी।

समय पर हो ऐलान
किसान विरेंद्र डागर ने कहा कि समय पर सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए। साथ ही समय पर ही सरकारी एजेंसी एफसीआई-एफडीआई को फसल खरीदने के लिए आना चाहिए। उन्होंने कहा कि नजफगढ़ अनाज मंडी में पिछले वर्ष सरसो का भाव 4200 रुपये घोषित हुआ था लेकिन इसका ऐलान मार्च के दूसरे-तीसरे सप्ताह में हुआ।

Desk Team