DU के नए पीजी इतिहास सिलेबस से दिल्ली सल्तनत समेत कई पुराने पाठ्यक्रम को किया बाहर

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Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के 2026-27 के नए सिलेबस को लेकर विवाद शुरू हो गया है। तीसरे सेमेस्टर के लिए जारी अंतिम सिलेबस में दिल्ली सल्तनत के इतिहास पर लंबे समय से पढ़ाया जा रहा ‘द दिल्ली सल्तनत : स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया’ वैकल्पिक पेपर शामिल नहीं है। इसके साथ ही प्राचीन और आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़े कुछ अन्य पुराने पेपर भी नए सिलेबस से बाहर हो गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव पीजी पाठ्यक्रम ढांचा-2024 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के अनुरूप की जा…

Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के 2026-27 के नए सिलेबस को लेकर विवाद शुरू हो गया है। तीसरे सेमेस्टर के लिए जारी अंतिम सिलेबस में दिल्ली सल्तनत के इतिहास पर लंबे समय से पढ़ाया जा रहा ‘द दिल्ली सल्तनत : स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया’ वैकल्पिक पेपर शामिल नहीं है। इसके साथ ही प्राचीन और आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़े कुछ अन्य पुराने पेपर भी नए सिलेबस से बाहर हो गए हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव पीजी पाठ्यक्रम ढांचा-2024 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के अनुरूप की जा रही निरंतर सिलेबस समीक्षा का हिस्सा है। दिल्ली सल्तनत से संबंधित यह पेपर छात्रों को केवल शासकों और युद्धों की जानकारी देने तक सीमित नहीं था, बल्कि मध्यकालीन उत्तर भारत में राज्य व्यवस्था, सत्ता के स्वरूप, प्रशासनिक ढांचे और सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को समझने का अवसर देता था। यह विषय लंबे समय से एमए इतिहास के तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता रहा है।

नए सिलेबस में ‘जेंडर एंड वुमेन इन अर्ली इंडिया’ को भी जगह नहीं मिली है। इस पेपर के माध्यम से प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति और उनकी सामाजिक भूमिका का अध्ययन कराया जाता था। इसके अलावा ‘पॉलिटिकल प्रोसेसेज एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटीज इन एंशिएंट इंडिया’ तथा ‘रिलिजन एंड सोसाइटी इन एंशिएंट इंडियन लिटरेचर’ जैसे पेपर भी अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। उत्तर भारत के इतिहास से जुड़े अन्य प्रस्तावित विषयों को भी अंतिम सिलेबस में जगह नहीं मिली है।

जानकारी के अनुसार, इतिहास विभाग की ओर से तीसरे सेमेस्टर के लिए कुल 38 डीएसई यानी विषय-विशेष वैकल्पिक पेपर प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि, 7 अगस्त को जारी अंतिम अधिसूचित सिलेबस में इनमें से केवल 16 पेपर शामिल किए गए। रिकॉर्ड के अनुसार कुछ विषय सिलेबस मंजूरी प्रक्रिया में आगे बढ़े थे, लेकिन अंतिम सूची में नहीं आ सके। कुछ पेपर अभी चर्चा के स्तर पर हैं, जबकि कुछ पर चर्चा नहीं हुई है।

सिलेबस में हुए बदलाव को लेकर शिक्षकों और छात्रों के बीच यह चर्चा भी है कि पुराने विषयों को हटाने के बजाय उन्हें नए पाठ्यक्रम ढांचे के साथ किस तरह समायोजित किया जा सकता था। खासकर दिल्ली सल्तनत, प्राचीन भारतीय राजनीति और समाज जैसे विषय इतिहास की अलग-अलग अवधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में अंतिम सिलेबस में इनकी अनुपस्थिति को लेकर अकादमिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

 

Sumant Chaudhary