दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी में इमारतों को भूकंप के लिहाज से सुरक्षित बनाने के लिए कार्य योजना का क्रियान्वयन नहीं करने को लेकर गुरुवार को केजरीवाल सरकार और नगर निगमों को फटकार लगाई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तारीख तय की है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि शहर को भूकंप से सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों के संबंध में दिल्ली सरकार और नगर निगमों द्वारा दाखिल जवाब असरदार नहीं हैं। याचिकाकर्ता और वकील अर्पित भार्गव ने बताया कि पीठ ने कहा कि अधिकारी मामले में कोर्ट के पूर्व के निर्देशों और आप सरकार द्वारा बनाई कार्य योजना को लागू करते दिखाई नहीं दिए।
अर्पित भार्गव ने दिल्ली में इमारतों में भूकंपीय स्थिरता के अभाव के मुद्दे पर याचिका दायर की है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगमों को स्थिति रिपोर्ट दायर करने के निर्देश दिए हैं जिसमें उनसे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कम से कम 25 इमारतों का उल्लेख करने को कहा गया है जहां यह कार्य योजना लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि पीठ ने यह भी कहा कि कागजों पर बहुत अच्छी और ‘‘अच्छे शब्दों’’ में लिखे दिशा निर्देश/अधिसूचना तैयार की गई लेकिन जमीन पर इन्हें लागू नहीं किया गया। कोर्ट ने राजधानी और उसके आसपास के हिस्सों में लगातार आ रहे भूकंप पर 9 जून को चिंता जाहिर करते हुए दिल्ली सरकार और सभी नागरिक एजेंसियों को निर्देश देते हुए भूकंप से निपटने के लिए अपनी तैयारियों की योजना के बारे में तत्काल आधार पर हलफनामा दायर करने को कहा था।


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