CBSE Revaluation Portal : हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने शुक्रवार को सीबीएसई का री-वैल्यूएशन पोर्टल फिर से खोलने के लिए कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया। यह मामला जुलाई में रोस्टर बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की डिवीज़न बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद कोई भी निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। एसजी तुषार मेहता ने तर्क दिया कि 1.27 लाख असंतुष्ट छात्रों ने सीबीएसई पोर्टल के ज़रिए संपर्क किया है।
इन छात्रों की 3.86 कॉपियों की जांच की जा रही है। यह भी बताया गया कि री-वैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) की प्रक्रिया दो बार खोली गई थी और जिन छात्रों को शिकायत थी, उन्होंने इसके लिए आवेदन किया है। एसजी मेहता ने कहा कि अगर री-वैल्यूएशन पोर्टल को फिर से खोलने का आदेश दिया जाता है तो इससे परीक्षा में शामिल हुए 70 लाख से ज़्यादा छात्र प्रभावित होंगे, क्योंकि इससे अंडरग्रेजुएट कोर्स में उनके एडमिशन की प्रक्रिया या संभावनाओं में देरी होगी।
“पोर्टल खुलने से सभी छात्र प्रभावित नहीं होंगे”
वहीं, याचिकाकर्ता एनएसयूआई के वकील ने कोर्ट से री-वैल्यूएशन पोर्टल को तीन दिन के लिए फिर से खोलने का आदेश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पोर्टल खुलने से सभी छात्र प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि सिर्फ वही छात्र आवेदन करेंगे, जिन्हें कोई शिकायत है। बता दें कि एनएसयूआई ने एक जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और मुआवज़े के तौर पर अतिरिक्त अंक (कम्पेंसेटरी मार्क्स) देने और री-वैल्यूएशन पोर्टल को एक महीने के लिए फिर से खोलने का आदेश देने की मांग की थी।
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