HIV Treatment in Delhi: राजधानी में एचआईवी नियंत्रण की कोशिशों के बीच एक अहम चुनौती सामने आई है-इलाज के दौरान कई मरीज बीच में ही दवाएं छोड़कर संपर्क से बाहर हो रहे हैं। ऐसे मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब दिल्ली सरकार ने उन्हें दोबारा इलाज से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। दिल्ली राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (डीएसएसीएस) द्वारा चलाए जा रहे “ईच वन रीच वन” अभियान के तहत अब स्वास्थ्य टीमें ऐसे मरीजों की पहचान कर सीधे उनके घर तक पहुंच रही हैं। दूरभाष, सामुदायिक नेटवर्क और स्थानीय संगठनों की मदद से उन्हें फिर से उपचार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों से न केवल उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ता है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे एचआईवी नियंत्रण की पूरी रणनीति प्रभावित हो सकती है।
दिल्ली में इलाज छोड़ रहे HIV मरीजों पर सरकार का एक्शन: ‘ईच वन रीच वन’ के तहत अब घर-घर पहुंचेगी टीम
Summary :
HIV Treatment in Delhi: राजधानी में एचआईवी नियंत्रण की कोशिशों के बीच एक अहम चुनौती सामने आई है-इलाज के दौरान कई मरीज बीच में ही दवाएं छोड़कर संपर्क से बाहर हो रहे हैं। ऐसे मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब दिल्ली सरकार ने उन्हें दोबारा इलाज से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। दिल्ली राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (डीएसएसीएस) द्वारा चलाए जा रहे “ईच वन रीच वन” अभियान के तहत अब स्वास्थ्य टीमें ऐसे मरीजों की पहचान कर सीधे उनके घर तक पहुंच रही हैं। दूरभाष, सामुदायिक नेटवर्क और स्थानीय संगठनों की मदद से उन्हें फिर…

डीएसएसीएस के परियोजना निदेशक सम्यक एस जैन ने बताया कि यह अभियान विशेष रूप से उन मरीजों पर केंद्रित है, जो किसी कारणवश उपचार से दूर हो गए हैं। उन्होंने कहा,“हमारा उद्देश्य हर उस मरीज तक पहुंचना है, जो इलाज से छूट गया है। ‘ईच वन रीच वन’ के जरिए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति उपचार से बाहर न रहे।” उन्होंने बताया यह पहल राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) की रणनीति के अनुरूप चलाई जा रही है, जिसका लक्ष्य 95-95-99 मानकों को हासिल करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इलाज बीच में छोड़ने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो एचआईवी संक्रमण को रोकने की दिशा में हासिल की गई प्रगति पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यह अभियान संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
इस लक्ष्य के तहत 95 प्रतिशत एचआईवी संक्रमित लोगों की पहचान की जाएगी, ताकि उन्हें समय पर इलाज मिल सके। 95 प्रतिशत पहचाने गए मरीजों को नियमित उपचार से जोड़ा जाएगा। 99 प्रतिशत इलाज ले रहे मरीजों में वायरस को इस स्तर तक नियंत्रित किया जाएगा कि संक्रमण फैलने का खतरा बेहद कम हो जाए।
रिपोर्ट: ववीता चौहान


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