IIT Delhi : देश की रक्षा और निगरानी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए आईआईटी दिल्ली ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्वदेशी एयरोस्टेट निगरानी प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया। यह तकनीक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) समर्थित परियोजना के तहत शिक्षाविदों, उद्योग और डीप-टेक स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित की गई है।
प्रदर्शन के दौरान लगभग 24 घन मीटर क्षमता वाले टेथर्ड एयरोस्टेट (रस्सी से बंधे निगरानी गुब्बारे) को 30 मीटर की ऊंचाई तक उड़ाया गया। इसने 10 किलोग्राम तक के पेलोड के साथ हाई-डेफिनिशन कैमरे और अन्य निगरानी उपकरणों का सफल परीक्षण किया। यह प्रणाली सीमा सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, आपदा प्रबंधन, दूरसंचार, ट्रैफिक प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और आपातकालीन सेवाओं में उपयोगी होगी।
रणनीतिक आयातित सामग्रियों पर निर्भरता होगी कम
एयरोस्टेट ड्रोन की तुलना में अधिक समय तक हवा में रह सकता है, इसकी संचालन लागत कम होती है और यह लगातार निगरानी करने में सक्षम है। साथ ही यह अधिक भार वहन करने और हर मौसम में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। इस तकनीक के विकास में आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने स्वदेशी एयरोस्टेट हुल सामग्री तैयार की, जिससे रणनीतिक आयातित सामग्रियों पर निर्भरता कम होगी।
इसके बाद एक स्टार्टअप ने पूरी एयरोस्टेट प्रणाली विकसित की, जबकि दूसरे स्टार्टअप ने लाइव हवाई तस्वीरों का वास्तविक समय में विश्लेषण करने वाली एआई तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। यह प्रणाली वस्तुओं की पहचान, गतिविधियों का विश्लेषण और स्वचालित अलर्ट जारी करने में सक्षम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत में स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास को नई गति देगी और भविष्य में सुरक्षा के साथ-साथ नागरिक उपयोग के लिए भी अत्याधुनिक निगरानी समाधान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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