Delhi News : दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) की राजौरी गार्डन स्थित जमीन पर लंबे समय से कब्जे को लेकर अब बोर्ड सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। डूसिब के अधिकारियों के अनुसार, ईश्वर कामधेनु रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और कवात्रा टेंट एंड कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जमीन खाली नहीं की गई है। अदालतों के निर्देश के बावजूद कब्जा जारी रहने के कारण अब संबंधित प्रॉपर्टी को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
डूसिब के प्रधान निदेशक पी.के. झा ने बताया कि जमीन खाली कराने के लिए बोर्ड की ओर से न्यायालय का सहारा लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद कब्जाधारियों को जमीन खाली करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में जमीन खाली नहीं की गई। उन्होंने बताया कि बोर्ड अब अदालत के आदेश के अनुपालन में बुधवार को संबंधित प्रॉपर्टी को सील करने की कार्रवाई करने जा रहा है।
हर महीने लाखों के राजस्व नुकसान का दावा
अधिकारियों का कहना है कि जमीन खाली नहीं होने के कारण सरकार को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। डूसिब का कहना है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी जमीन पर कब्जा बनाए रखना स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में अब संपत्ति को खाली कराने और उस पर बोर्ड का कब्जा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज हो चुकी है याचिका
इस मामले में गत महीने सुप्रीम कोर्ट ने कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कब्जाधारी कंपनियों को जमीन खाली करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। 10 अगस्त को हाईकोर्ट ने ईश्वर कामधेनु रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और कवात्रा टेंट एंड कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड को पंडाल और अन्य ढांचे हटाकर जमीन खाली करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया था। यह अवधि 17 अगस्त को समाप्त हो गई।
कब्जा बनाए रखने का नहीं बनता अधिकारः हाईकोर्ट
विवाद की शुरुआत तब हुई जब अनुबंध के तहत जमीन हासिल करने वाली कंपनियों ने लीज अवधि पूरी होने के बाद भी जमीन खाली करने से इनकार कर दिया। कंपनियों ने समझौते की धारा-6 का हवाला देते हुए नई नीलामी और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक कब्जा बनाए रखने का दावा किया था। हाईकोर्ट ने इस व्याख्या को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रावधान अधिकतम छह महीने तक ही विस्तार की अनुमति देता है। चूंकि कब्जाधारी पहले ही यह अधिकतम अवधि ले चुके थे, इसलिए नई टेंडर प्रक्रिया लंबित होने के आधार पर आगे कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं बनता।
मामले की लेंगे जानकारी, जांच के देंगे आदेशः आशीष सूद
दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने मामले की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह संबंधित विभाग से पूरे मामले की जानकारी लेंगे और जांच के आदेश के बाद अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देंगे।


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