JNU Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को शिक्षा मंत्रालय तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें विश्वविद्यालय परिसर के बाहर ही रोक दिया।
आधा किलोमीटर तक मार्च करने में रहे सफल
एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से 43 छात्रों को हिरासत में लिया और उन्हें थाने ले जाया गया, जहां से बाद में उन्हें जाने दिया गया। छात्रों को परिसर से बाहर जाने से रोकने के लिए कई स्तरों पर अवरोधक लगाने के साथ भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। हालांकि, छात्र परिसर के बाहर आधा किलोमीटर तक मार्च करने में सफल रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया।
परिसर के बाहर मार्च करने की कोई अनुमति नहीं
छात्र संगठन ने बताया कि बाद में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव सहित एक प्रतिनिधिमंडल को पुलिस द्वारा शिक्षा मंत्रालय में अधिकारियों से मिलने के लिए ले जाया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने पहले कहा था कि छात्रों को परिसर के बाहर मार्च करने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारी ने कहा था, ‘‘यदि वे विश्वविद्यालय से बाहर आएंगे तो उन्हें रोक दिया जाएगा।’’ मार्च का आह्वान विश्वविद्यालय परिसर में 13वें दिन जारी भूख हड़ताल का हिस्सा था। यह हड़ताल 11 अगस्त को शुरू हुई थी। छात्रों के एक वर्ग ने कक्षाओं का बहिष्कार करके विश्वविद्यालय में पूर्ण हड़ताल के आह्वान में भी भाग लिया।
‘प्रॉक्टोरियल’ जांच को वापस लेने की मांग कर रहे हैं
छात्र छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि, परिसर में जाति आधारित जनगणना, परिसर में विरोध प्रदर्शनों पर लगे प्रतिबंध को हटाने और विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ शुरू की गई ‘प्रॉक्टोरियल’ जांच को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। जेएनयू छात्र संघ की बीएपीएसए से संबद्ध महासचिव प्रियांशी आर्य ने यह कहते हुए खुद को विरोध प्रदर्शन से अलग कर लिया है कि छात्र संघ को पहले कुलपति कार्यालय के 100 मीटर के दायरे के निषिद्ध क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।
आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा कि वह छात्र संघ द्वारा बुलाए गए मार्च या विश्वविद्यालय में पूर्ण हड़ताल में हिस्सा नहीं लेगी।


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