उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा से वकीलों के साथ संयम से पेश आने का बृहस्पतिवार को आग्रह किया। इससे दो दिन पहले भूमि अधिग्रहण के एक मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने एक वकील को अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
दिन की कार्यवाही के लिए अदालत कक्ष तीन में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ के एकत्रित होने के साथ ही कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना की अगुवाई में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस मामले का जिक्र किया।
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यह मुद्दा इसलिए उठा क्योंकि भूमि अधिग्रहण मामलों की सुनवाई कर रही पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे न्यायमूर्ति मिश्रा ने मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन को उस समय अवमानना की चेतावनी दी थी जब वह मामले में अपनी दलीलें रख रहे थे।
अधिवक्ताओं के इस मामले का जिक्र करते ही न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उनके कथन से अगर किसी को दुख पहुंचा है तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी न्यायाधीश की तुलना में बार का अत्यधिक सम्मान करते हैं। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “अगर किसी को किसी भी वक्त पीड़ा पहुंची हो, मैं हाथ जोड़ कर माफी मांगता हूं।”


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