गंगाराम हॉस्पिटल का चमत्कार, लेजर तकनीक से निकाला भोजन नली में फंसा नकली दांत

Summary :

Laser Technology in HealthCare: राजधानी के सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक का उपयोग करते हुए एक जटिल मामले को सफलतापूर्वक सुलझाया है। डॉक्टरों ने लेजर कटर की मदद से एंडोस्कोपिक प्रक्रिया अपनाकर एक मरीज की भोजन नली में गहराई तक फंसे नकली दांत को निकाल दिया, जिससे उसे बड़ी सर्जरी से बचाया जा सका। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज को सांस लेने में दिक्कत, गले में तेज दर्द और निगलने में परेशानी की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि उसने गलती से अपना नकली दांत निगल लिया था, जो…

Laser Technology in HealthCare: राजधानी के सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक का उपयोग करते हुए एक जटिल मामले को सफलतापूर्वक सुलझाया है। डॉक्टरों ने लेजर कटर की मदद से एंडोस्कोपिक प्रक्रिया अपनाकर एक मरीज की भोजन नली में गहराई तक फंसे नकली दांत को निकाल दिया, जिससे उसे बड़ी सर्जरी से बचाया जा सका। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज को सांस लेने में दिक्कत, गले में तेज दर्द और निगलने में परेशानी की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था।

जांच में पता चला कि उसने गलती से अपना नकली दांत निगल लिया था, जो ग्रासनली (इसोफैगस) के ऊपरी हिस्से में, भोजन नली और श्वसन नली के जंक्शन के ठीक नीचे फंस गया था। इस कारण उसे सीने में भी गंभीर दर्द हो रहा था। इस मामले को बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैन्क्रियाटिकबिलियरी साइंसेज (आईएलजीपीएस) के अध्यक्ष अनिल अरोरा ने कहा कि इस मामले में पारंपरिक निष्कासन विधियों से चोट लगने का काफी जोखिम था। इमेजिंग जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नकली दांत एक बेहद संवेदनशील स्थान पर फंसा हुआ है, जहां से उसे निकालना जोखिम भरा था।

 ग्रासनली की परत फटने का खतरा

डॉ. अरोड़ा के अनुसार पारंपरिक तरीकों से इसे हटाने पर ग्रासनली की परत फटने का खतरा था। चिकित्सकों ने सटीक एंडोस्कोपिक मार्गदर्शन में लेजर बीम का उपयोग करते हुए दांत को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा। इसके बाद एक विशेष सुरक्षात्मक ट्यूब डालकर नुकीले टुकड़ों से आसपास के ऊतकों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि इस लेजर-सहायता प्राप्त तकनीक से बिना ओपन सर्जरी के जटिल विदेशी वस्तुओं को निकालना संभव हो गया है। सफल प्रक्रिया के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।