‘मुझे न्याय की उम्मीद नहीं…’, अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी

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Manish Sisodia letter to Justice Swarana Kanta: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि आबकारी नीति मामले में अदालत में उनकी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा और उन्हें न्याय का भरोसा नहीं है। उन्होंने भी कहा कि उनके पास अब सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। ‘मुझे आपसे न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं’ पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में कहा, “मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। आपके बच्चे तुषार…

Manish Sisodia letter to Justice Swarana Kanta: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि आबकारी नीति मामले में अदालत में उनकी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा और उन्हें न्याय का भरोसा नहीं है। उन्होंने भी कहा कि उनके पास अब सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

‘मुझे आपसे न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं’

पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में कहा, “मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। आपके बच्चे तुषार मेहता जी के हाथों में है। ऐसी स्थिति में मुझे आपसे न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।” उन्होंने अपने विरोध को सत्याग्रह का रास्ता बताया। इससे एक दिन पहले अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी थी और उन्होंने भी क़ानूनी कार्यवाही पर चिंता व्यक्त की थी।

अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी

अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी में न्यायपालिका के प्रति अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह खुद या वकील के जरिए अदालत में पेश नहीं होंगे। उन्होंने ये भी भी कहा की अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद पूरी तरह टूट चुकी है। केजरीवाल ने इस फैसले को अपनी अंतरात्मा की आवाज बताया। उन्होंने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली शराब नीति से जुड़ा है। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से कहा था कि वे इस केस की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की थी, क्योंकि उन्हें पक्षपात की आशंका है। उन्होंने कुछ कारण भी बताए, जैसे जज के परिवार का सरकारी वकीलों के साथ जुड़ाव।

हालांकि, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने साफ़ शब्दों में खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि वे संविधान के अनुसार काम करती हैं और किसी दबाव में नहीं झुकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि बिना सबूत ऐसे आरोप लगाना गलत है और इससे न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ता है। जज ने साफ कहा कि अगर वे हट जाएंगी, तो गलत संदेश जाएगा कि दबाव बनाकर जज को हटाया जा सकता है।

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Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।