MBBS Admission Scam: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट ने नीट-यूजी परीक्षा में दाखिला दिलाने और पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संतोष कुमार जायसवाल, डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम, संत प्रताप सिंह और विनोद भाई भीखा भाई पटेल के रूप में हुई है। ये आरोपी मिलकर नीट अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को निशाना बना रहे थे। आरोपी 20 से 30 लाख रुपये तक लेकर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देते थे और परीक्षा से पहले “पक्का पेपर” उपलब्ध कराने का दावा कर ठगी को अंजाम देते थे। डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया आरोपियों को एसीपी सतेंद्र मोहन की देखरेख में इंस्पेक्टर सुनील कालखंडे, इंस्पेक्टर यशेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर महिपाल सिंह के नेतृत्व में सब इंस्पेक्टर डेज़ी डागर, ऋषि, अंकित, गौरव की टीम ने पकड़ा है।
क्राइम ब्रांच ने सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने 18 छात्रों को अलग-अलग ठिकानों पर ठहराकर उन्हें फर्जी प्रश्न पत्र दिए, जो पुराने पेपर्स और कोचिंग मटेरियल को मिलाकर तैयार किए गए थे। इनमें कुछ नाबालिग छात्र भी शामिल थे। समय रहते कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला और गिरोह के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब दो मई को सूरत पुलिस से दिल्ली पुलिस को इस गिरोह की सूचना मिली। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी के आधार पर महिपालपुर एक्सटेंशन स्थित कई होटलों में छापेमारी की। यहां से विनोद भाई भीखा भाई पटेल समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पटेल गुजरात के छात्रों को अपने जाल में फंसाने का काम करता था। जांच में सामने आया कि आरोपी अभिभावकों को मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने की गारंटी देते थे और उनसे मोटी रकम के साथ-साथ 10वीं-12वीं की मूल मार्कशीट, साइन किए हुए खाली चेक और अन्य दस्तावेज भी ले लेते थे। इतना ही नहीं, कुछ छात्रों को उनके परिवार से अलग कर दिया गया था ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके।
गाजियाबाद से गिरफ्तार गिरोह का मास्टरमाइंड
पुलिस ने गाजियाबाद में एक अस्पताल के पास जाल बिछाकर तीन छात्रों को छुड़ाया और मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार किया। इसके बाद एक फ्लैट पर छापेमारी कर 15 और छात्रों को मुक्त कराया गया। इसी दौरान संत प्रताप सिंह और डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, जायसवाल इस पूरे नेटवर्क का मुख्य साजिशकर्ता था, जबकि डॉ. आलम फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करता था। संत प्रताप सिंह लॉजिस्टिक्स और ठहरने की व्यवस्था संभालता था, जबकि पटेल बिचौलिए के रूप में परिवारों से संपर्क करता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 149 पन्नों की फर्जी प्रश्न-उत्तर सामग्री, तीन साइन किए हुए खाली चेक और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है। पुलिस अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
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