Medical Education Crisis: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने 2,300 से अधिक पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों के लंबित फाइनल एग्जिट एग्जाम को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ये परीक्षाएं अक्टूबर 2024 के बाद से आयोजित नहीं हुई हैं, जिसके चलते युवा डॉक्टर लंबे समय से अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। इस देरी का उनके करियर, मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
क्लिनिकल प्रैक्टिस में रुकावट
फेमा के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से सीपीएस (कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन) कोर्स से जुड़े नियामकीय विवाद के कारण उत्पन्न हुई है, जो वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका खामियाजा रेजिडेंट डॉक्टरों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और क्लिनिकल प्रैक्टिस में रुकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फेमा ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
संगठन ने एनएमसी को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि संबंधित पक्ष समय पर कोर्ट में जवाब दाखिल करें, लंबित परीक्षाओं का जल्द शेड्यूल जारी किया जाए और भविष्य में ऐसी देरी रोकने के लिए नियामकीय प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। फेमा ने कहा कि योग्य डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। परीक्षाओं में देरी न केवल डॉक्टरों के भविष्य, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है।


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