Delhi Malviya Nagar Fire : गुरुवार को राजधानी के मालवीय नगर के होटल में लगी आग के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। जांच के दौरान सुरक्षा में कई खामियां सामने आई हैं। शुरुआती जांच के नतीजों से पता चला है कि आग में मारे गए लोगों में ज्यादातर की जान चोटों के बजाए दम घुटने और फेफड़ों में धुआं भर जाने की वजह से हुई।
सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने गेस्ट हाउस के हर कमरे की तलाशी ली और वहां से पुलिस को लगभग 50 से 60 मोबाइल फोन मिले हैं। इसके अलावा कमरों की तलाशी की दौरान पुलिस को 30 पासपोर्ट भी मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि आग पर काबू पाने के बाद भी गेस्ट हाउस के अंदर के कमरे बहुत ज़्यादा गर्म थे, जिससे आग की तीव्रता और इमारत के अंदर गर्मी और धुएं के असर का पता चलता है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतकों के शवों पर जलने के ज्यादा निशान नहीं थे।
शुरुआती जांच से पता चलता है कि ज्यादातर पीड़ितों की मौत दम घुटने और धुएं के संपर्क में आने से हुई। सूत्रों के मुताबिक, गेस्ट हाउस में ठहरे ज़्यादातर विदेशी नागरिक मेडिकल वीज़ा पर भारत आए थे। सूत्रों ने आगे बताया कि गेस्ट हाउस में हर महीने करीब 80 विदेशी नागरिक ठहरते थे। तय नियमों के अनुसार, विदेशी मेहमानों के लिए सी-फॉर्म नियमित रूप से भरे जाते थे और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) में जमा किए जाते थे।
सुरक्षा ढांचे में कई गंभीर कमियां
एक बार जमा होने के बाद विदेशी नागरिकों की जानकारी दिल्ली पुलिस के सिस्टम में भी दिखाई देती थी। सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान अधिकारियों को इमारत के सुरक्षा ढांचे में कई गंभीर कमियां भी मिलीं। इमारत की खिड़कियां और कांच के पैनल पूरी तरह से सील थे, जिससे धुआं बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
यही नहीं घटना के वक्त बेसमेंट का प्रवेश द्वार भी बंद था। बताया जा रहा है कि बेसमेंट के प्रवेश द्वार को खोलने में लगभग 10 मिनट लगे। सूत्रों के अनुसार, बेसमेंट का दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में उस जगह से छह से सात लोगों को बचाया गया। बचाव अभियान के दौरान टीमों को बेसमेंट के रास्ते में लगभग ढाई फुट ऊंची लोहे की जाली की एक रुकावट का भी सामना करना पड़ा।
इमारत में नहीं था आपातकालीन गेट
बचाव दल को इस रुकावट को काटकर आगे बढ़ने और लोगों को बाहर निकालने के काम को जारी रखने में लगभग 10 मिनट लगे। जांच में यह भी पता चला है कि इमारत में हवा आने-जाने की उचित व्यवस्था नहीं थी और न ही कोई आपातकालीन निकास द्वार था। सूत्रों के अनुसार, इन्हीं कमियों के कारण धुआं तेजी से पूरी इमारत में फैल गया, जिससे अंदर मौजूद लोग फंस गए और उन्हें बाहर निकालने के काम में काफी सारी बाधाएं आई।
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