एम्स में शुरू हुआ नेशनल रेटिना स्किल डेवलपमेंट सेंटर, 100 से अधिक विशेषज्ञों को मिलेगा प्रशिक्षण

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AIIMS : एम्स नई दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज ने देश में रेटिना देखभाल की क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल की है। सेंटर ने रोश इंडिया हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (आरआईएचआई) के सहयोग से नेशनल रेटिना स्किल डेवलपमेंट सेंटर में ‘मॉड्यूलेटेड रेटिना ट्रेनिंग प्रोग्राम’ शुरू किया है। इसे भारत में अपनी तरह का पहला अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र बताया गया है, जहां नेत्र रोग विशेषज्ञों को रेटिना संबंधी बीमारियों की पहचान, जांच और उपचार के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्घाटन 17 अगस्त को डॉ. आरपी सेंटर की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन ने किया।…

AIIMS : एम्स नई दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज ने देश में रेटिना देखभाल की क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल की है। सेंटर ने रोश इंडिया हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (आरआईएचआई) के सहयोग से नेशनल रेटिना स्किल डेवलपमेंट सेंटर में ‘मॉड्यूलेटेड रेटिना ट्रेनिंग प्रोग्राम’ शुरू किया है। इसे भारत में अपनी तरह का पहला अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र बताया गया है, जहां नेत्र रोग विशेषज्ञों को रेटिना संबंधी बीमारियों की पहचान, जांच और उपचार के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस पहल का उद्घाटन 17 अगस्त को डॉ. आरपी सेंटर की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन ने किया। इस अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रो. डीके शर्मा, प्रो. प्रदीप वेंकटेश, प्रो. प्रवीण वशिष्ठ, प्रो. नम्रता शर्मा और प्रो. तनुज दादा समेत रेटिना फैकल्टी और आरआईएचआई की टीम मौजूद रही।

आठ मॉड्यूल में मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

इस अवसर पर आरपीआई सेंटर की प्रमुख डॉ. राधिका टंडन ने कहा कि कार्यक्रम के तहत अगले तीन वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े 100 से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की योजना है। प्रशिक्षण को आठ मॉड्यूल में बांटा गया है। इसका उद्देश्य सामान्य नेत्र रोग विशेषज्ञों को रेटिना की बीमारियों की शुरुआती पहचान, सही निदान और उपचार की व्यावहारिक क्षमता से लैस करना है। उन्होंने बताया कि केंद्र में अत्याधुनिक ‘रेटिना स्किल लैब कोर (सीओआरई)’ स्थापित की गई है। इसमें हाई-रिजॉल्यूशन ओसीटी, फंडस कैमरा और विशेष माइक्रोस्कोप जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं। इससे विशेषज्ञों को वास्तविक क्लिनिकल परिस्थितियों के अनुरूप हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण मिलेगा।

देश में रेटिना विशेषज्ञों की कमी बड़ी चुनौती

आरपीआई सेंटर के कम्युनिटी अप्थाल्मोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि रेटिना देखभाल के लिए विशेषज्ञों के साथ-साथ व्यावहारिक और क्लिनिकल कौशल वाले पेशेवरों की जरूरत है। प्रशिक्षण का उद्देश्य विशेषज्ञ सेवाओं को बड़े केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में कार्यरत नेत्र रोग विशेषज्ञों तक पहुंचाना है। विट्रियो-रेटिना सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनुसार देश में करीब 1,700 रेटिनोलॉजिस्ट हैं।

वहीं डायबिटिक रेटिनोपैथी और उम्र से जुड़ी मैकुलर डिजेनरेशन जैसी बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में यह प्रशिक्षण आम नेत्र रोग विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

Sumant Chaudhary