15 साल से दिल्ली में लग्जरी कारें चुरा म्यांमार बॉर्डर तक पहुंचा रहा गैंग, गैंगस्टर अमित नागर समेत तीन गिरफ्तार

Summary :

Police Busted A car Theft Gang : दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी कारें चोरी कर उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों के रास्ते म्यांमार सीमा तक पहुंचाने वाले संगठित गिरोह का क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। एआरएससी टीम ने गैंग के सरगना अमित नागर उर्फ सोनू समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह चोरी की कारों को फर्जी नंबर प्लेट और जाली आरसी के सहारे खपाता था। इस नेटवर्क के तार मणिपुर, नागालैंड, असम, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक फैले हुए थे। स्पेशल सीपी क्राइम एच.जी.एस. धालीवाल के मार्गदर्शन में डीसीपी संजीव कुमार यादव की देखरेख में…

Police Busted A car Theft Gang : दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी कारें चोरी कर उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों के रास्ते म्यांमार सीमा तक पहुंचाने वाले संगठित गिरोह का क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। एआरएससी टीम ने गैंग के सरगना अमित नागर उर्फ सोनू समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह चोरी की कारों को फर्जी नंबर प्लेट और जाली आरसी के सहारे खपाता था। इस नेटवर्क के तार मणिपुर, नागालैंड, असम, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक फैले हुए थे। स्पेशल सीपी क्राइम एच.जी.एस. धालीवाल के मार्गदर्शन में डीसीपी संजीव कुमार यादव की देखरेख में एसीपी संजय नागपाल, इस्पेक्टर अरुण सिंधु के नेतृत्व की टीम ने यह कार्रवाई की है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर पांच चोरी की कारें, डुप्लीकेट चाबियां, 104 फर्जी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) और 24 फर्जी आरसी बरामद की हैं। इनमें किआ सेल्टोस और हुंडई क्रेटा जैसी दो चोरी की कारें मणिपुर के उखरुल जिले में म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि इन कारों को सीमा क्षेत्र में भूमिगत समूहों को बेचने की तैयारी थी।

15 साल से चला रहा था नेटवर्क

क्राइम ब्रांच के अनुसार, रोहिणी निवासी 35 वर्षीय अमित नागर करीब 15 वर्षों से वाहन चोरी के नेटवर्क में सक्रिय था। उसके खिलाफ वाहन चोरी और आर्म्स एक्ट समेत 38 मामले दर्ज हैं। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने 2009-10 में हाईएंड कारें चोरी करना शुरू किया था। बाद में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डुप्लीकेट चाबियों की मदद से कारों की सुरक्षा प्रणाली को बायपास करने का तरीका सीखा।

अमित चोरी की कारें अपने नेटवर्क के जरिए अलग-अलग राज्यों में भेजता था। मणिपुर निवासी 45 वर्षीय एटम जगत सिंह और 28 वर्षीय मुकेश सिंह चोरी की गाड़ियों को खरीदकर आगे बेचने का काम करते थे। पूछताछ में जगत सिंह ने कथित तौर पर बताया कि वह अमित से करीब 1.5 से 2 लाख रुपये में चोरी की कार खरीदकर 40-50 हजार रुपये तक मुनाफे में आगे बेचता था।

फर्जी नंबर प्लेट और आरसी का पूरा खेल

पुलिस ने मुकेश सिंह के किराये के ठिकाने से 104 फर्जी एचएसआरपी और 22 फर्जी आरसी बरामद कीं। उसके पास से दो अन्य जाली आरसी भी मिलीं। जांच में सामने आया कि चोरी की कारों की पहचान बदलने के लिए फर्जी दस्तावेज और नंबर प्लेट तैयार किए जाते थे। गिरोह के सदस्य आपस में संपर्क के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल करते थे।

Sumant Chaudhary