एनजीटी ने कहा- दिल्ली के कचरा स्थलों का नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा है कि दिल्ली के कचरा स्थलों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है। अधिकरण ने एक समिति गठित कर इसे मुद्दे पर बैठक करने का निर्देश दिया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि दिल्ली के कचरा स्थलों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है। अधिकरण ने एक समिति गठित कर इसे मुद्दे पर बैठक करने का निर्देश दिया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अगुवाई वाली पीठ द्वारा गठित समिति में सचिव, शहरी विकास दिल्ली, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और स्थानीय निकायों को शामिल किया गया है। 
पीठ ने कहा, ‘‘इस बैठक की अध्यक्षता दिल्ली शहरी विकास सचिव कर सकते हैं। समन्वय और अनुपालन की नोडल एजेंसी सीपीसीबी और डीपीसीसी होंगे। इस बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार आगे कदम उठाए जा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सीपीसीबी सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू करने के लिए उचित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर सकता है।’’ 
अधिकरण ने करोल बाग के बापा नगर में मिलिटरी रोड से कचरा नहीं हटाए जाने के खिलाफ दिल्ली निवासी अनुभव की याचिका पर सुनवाई के दौरान संबंधित निर्देश दिया। याचिका में कहा गया है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम जिस गड्ढे में कचरा डालता है, वह आवासीय इलाके के बीच स्थित है और इसके कारण क्षेत्र के निवासियों को श्वसन संबंधी गंभीर समस्याएं हो रही हैं। 
अधिकरण ने इस बात पर गौर किया कि जिस स्थल का याचिका में जिक्र है, उसे साफ किए जाने का दावा किया गया है, लेकिन अतीत की असफलताओं की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई और दिन में दो- तीन बार अपशिष्ट हटाए जाने का केवल परामर्श जारी किया गया है। पीठ ने कहा कि दिल्ली में इस समय इस्तेमाल की जा रही कचरा स्थल प्रणाली को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के नियम-15 के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है। 

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