हीटवेव के खतरों को लेकर एक्शन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्यों को जारी किए कड़े निर्देश

Summary :

NHRC Heatwave Guidelines 2026: दिल्ली सहित देशभर में चल रही हीटवेव के खतरों से लोगों को बचाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली सहित कई राज्यों को जरुरी उपाय करने के निर्देश दिये हैं। आयोग ने दिल्ली व इन राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर एकीकृत और समावेशी उपाय करने की जरुरत पर जोर दिया है। आयोग ने पत्र में राज्य सरकारों से अपर्याप्त आश्रय और संसाधनों के बीच भीषण में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, बाहरी श्रमिकों, बुजुर्गों, बच्चों, नवजात शिशुओं और विशेष रूप से बेघर लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए उचित कदम…

NHRC Heatwave Guidelines 2026: दिल्ली सहित देशभर में चल रही हीटवेव के खतरों से लोगों को बचाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली सहित कई राज्यों को जरुरी उपाय करने के निर्देश दिये हैं। आयोग ने दिल्ली व इन राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर एकीकृत और समावेशी उपाय करने की जरुरत पर जोर दिया है।

आयोग ने पत्र में राज्य सरकारों से अपर्याप्त आश्रय और संसाधनों के बीच भीषण में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, बाहरी श्रमिकों, बुजुर्गों, बच्चों, नवजात शिशुओं और विशेष रूप से बेघर लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए उचित कदम उठाने की मांग की है। इन राज्यों में दिल्ली, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। आयोग ने पाया है कि हीटवेव में बाहरी श्रमिकों और बेघर लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, क्योंकि उनके पास पर्याप्त आश्रय और संसाधनों की कमी होती है।

बुजुर्ग, बच्चे और नवजात शिशु अत्यधिक गर्मी से उत्पन्न हुए स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा हीटवेव से आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग लगने की दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आयोग ने बताया कि 2019-23 के बीच देश में हीटवेव से 3,712 लोगों की मौत ‌हो गई थी, आयोग ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे हीटवेव के प्रभाव को कम करने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए अपनी मौजूदा एसओपी या एनडीएमए द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राहत उपायों की सुचारू रूप से योजना बनाएं और कार्यान्वयन को सुगम बनाएं।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।