Orange Economy Will Get New Momentum : भारत की ऑरेंज इकोनॉमी – यानी क्रिएटिविटी, कला, संस्कृति और डिजिटल एंटरटेनमेंट आधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में केन्द्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत की ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (रचनात्मक अर्थव्यवस्था) को नई रफ्तार देने के लिए केंद्रीय बजट में 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी (AVGC- एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही, पूर्वी क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (NID) खोलने की घोषणा की गई है। सरकार का जोर अब आउटसोर्सिंग से हटकर भारत के अपने बौद्धिक संपदा (IP) और ओरिजिनल कंटेंट बनाने पर है। रचनाकारों को सक्रिय भागीदारी के लिए केन्द्र सरकार ने ‘मायवेव्स’ (Mywaves) और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज जैसी पहलों की शुरुआत की गई है।
5,000 करोड़ के निवेश से डिजिटल कंटेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर होगा मजबूत
इसी क्रम में ग्रेडिएंट इंफोटेनमेंट जैसी कंपनियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑरेंज इकोनॉमी विजन को गति देने के उद्देश्य से कंपनी ने चरणबद्ध तरीके से लगभग 5,000 करोड़ के निवेश और 200 नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से डिजिटल एंटरटेनमेंट और कंटेंट पोर्टफोलियो का विस्तार किया जा रहा है। हैदराबाद में आयोजित कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में इस मेगा निवेश योजना के पहले चरण को मंजूरी दी गई। इसके तहत कंटेंट निर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 110 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1,050 करोड़) का फंड जुटाया जाएगा।
ग्रेडिएंट इंफोटेनमेंट के प्रबंध निदेशक विमल राज माथुर ने कहा कि यह निवेश भारत को वैश्विक क्रिएटिव हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य भारतीय कला, संस्कृति और डिजिटल कंटेंट को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना है। यह निवेश नए रोजगार सृजित करेगा और ऑरेंज इकोनॉमी को देश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार बनाएगा। हमारा विशेष फोकस अफ्रीका और यूरोप जैसे उभरते बाजारों में भारतीय कंटेंट की मजबूत पहचान स्थापित करना है।”
कंपनी ने अपने कंटेंट पोर्टफोलियो के विस्तार के तहत 200 नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने की घोषणा की है। शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी 15 करोड़ के निवेश से 100 वर्टिकल माइक्रो-ड्रामा तैयार करेगी। ये कंटेंट मोबाइल ऐप्स, सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए बनाया जाएगा। भारत, यूरोप और अफ्रीका की विभिन्न लोकेशनों पर शूट होने वाले इन प्रोजेक्ट्स से 31 मार्च 2027 तक करीब 25 करोड़ के राजस्व की उम्मीद जताई गई है।
100 इंटरनेशनल म्यूजिक वीडियो भी होंगे तैयार
घरेलू और वैश्विक म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए कंपनी 50 करोड़ के बजट से 100 इंटरनेशनल म्यूजिक वीडियो का निर्माण करेगी। कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इन प्रोजेक्ट्स से करीब 75 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा।
इन दोनों योजनाओं पर कंपनी कुल 65 करोड़ का निवेश करेगी और वित्त वर्ष 2027 के अंत तक ₹100 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद है। ‘ब्रांड इंडिया’ को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य डॉ. विमल राज माथुर के अनुसार, यह निवेश केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय कलाकारों, फिल्मकारों, संगीतकारों और डिजिटल क्रिएटर्स के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और नए अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी का उद्देश्य एक ऐसा ‘एंटरटेनमेंट सुपरमार्केट’ विकसित करना है, जहां फिल्म, ओटीटी कंटेंट, फैशन, विज्ञापन, म्यूजिक और लाइव इवेंट्स जैसी सभी मनोरंजन सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हों। कंपनी का मानना है कि 5,000 करोड़ का यह निवेश वैश्विक क्रिएटिव इंडस्ट्री में ‘ब्रांड भारत’ की पहचान को और मजबूत करेगा।



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