नई दिल्ली : बुराड़ी के संत नगर इलाके में बीते वर्ष 30 जून की रात एक ही परिवार के 11 लोगों ने सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली थी। तफ्तीश के बाद पुलिस ने कहा है कि यह अंधविश्वास में एक्सिडेंटल सामूहिक मौतें थीं। कोई भी व्यक्ति आत्महत्या करना नहीं चाहता था। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।
पुलिस ने अभी न तो क्लोज रिपोर्ट दायर की है और न ही अनट्रेस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की है। मगर इन सबके बीच परिवार के आखिरी बेटे दिनेश चुंडावत ने दावा किया है कि उनके परिवार के सभी 11 सदस्यों की बड़े षड्यंत्र के तहत शातिर तरीके से हत्या की गई है। वह अपने इस ब्यान पर आज भी कायम हैं।
उनका कहना है कि अगर पुलिस ने ठीक से कार्रवाई किए बिना केस बंद कर दिया तो वह कोर्ट से केस को फिर रि-ओपन कराएंगे। इसके अलावा आरटीआई लगाकर मौके के सभी साक्ष्य, फुटेज व वीडियो को हासिल करेंगे। अपने परिवार को न्याय के लिए उन्हें कितना ही बड़ा वकील क्यों न करना पड़े, वो करेंगे और न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
आखिर क्यों जताया हत्या का शक…
दिनेश ने बताया कि उसके दोनों भाई ललित, भुवनेश और बहन प्रतिभा के बच्चे पढ़े लिखे थे। उनका अंधविश्वास से कोई मतलब नहीं। ऐसे में वे भी कैसे आत्महत्या कर सकते हैं। प्रतिभा की बेटी की तो कुछ दिन पहले ही सगाई भी हुई थी। वो क्यों आत्महत्या करती। दिनेश का कहना है कि घर में 11 सदस्य थे, जिसमें तीन पीढ़ी थीं। तीनों पीढ़ी के लोगों की सोच एक जैसी कभी नहीं हो सकती। अगर ललित अंधविश्वास में घिरा था, तो कम से कम बच्चे व दूसरे सदस्य तो यह कदम कभी नहीं उठाते।
जमीन पर पड़ी मिली थी नारायण देवी
सभी के गले में फांसी के फंदे थे, मगर पुलिस को 10 लोग ही फंदे के सहारे लटके मिले। घर की मुखिया नारायण देवी का शव एक अलमारी के पास कमरे में फर्श पर पड़ा था। अलमारी का हैंडल टूटा हुआ था। दिनेश का कहना है कि कोई व्यक्ति हैंडल के सहारे फांसी कैसे लगा सकता है।
क्राइम ब्रांच के ऑफिसरों ने की जांच
इस घटना ने दिल्ली समेत पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का जिम्मा तेज तर्रार क्राइम ब्रांच के ऑफिसरों को सौंपा गया। संवेदनशील मामलो को सुलझाने में एक्सपर्ट इंस्पेक्टर सतीश कुमार इस मामले के आईओ हैं। क्राइम ब्रांच के ऑफिसरों का कहना है कि घटना के बाद पुलिस को मौके से ऐसे साक्ष्य मिले, जिसने साबित कर दिया कि पूरा परिवार अंधविश्वास में घिरा हुआ था। परिवार के सभी सदस्य मानते थे कि ललित पर आत्मा आती हैं। उस वक्त वह जो कहता परिवार के सदस्य वैसा ही करते थे।
सामूहिक आत्महत्या नहीं एक्सिडेंटल मौतें
क्राइम ब्रांच की गहन तफ्तीश और साइंटिफिक जांच के बाद पुलिस का कहना है कि कोई भी व्यक्ति आत्महत्या करना नहीं करना चाहता था। सभी का अगले दिन का रूटीन तय था। पहले भी परिवार के सदस्य जाल से बरगद के पेड़ की जटाओं की तरह मौक्ष की प्राप्ती के लिए तपस्या कर चुके थे। मगर तब उनके उनके गले में फंदा तो था, लेकिन पैर जमीन पर टीके हुए थे। मगर 30 जून की रात जो तपस्या करनी थी वह लटक कर करनी थी।
उन्हें उम्मीद थी कि बरगद की जटाओं की तरह गले में फंदा डालकर तपस्या के बाद वे सभी लौट आएंगे, मरेंगे नहीं। एक रिजस्टर में लिखा था कि पूजा के दौरान बंधन टाइट हों। उन्होंने खुद को साड़ी और काले रंग के तार से कसकर बांधा था। कानों व आंख पर रूई लगाकर पट्टी बांधी गई थी। मुंह पर भी टेप लगी थी। पैैरों के नीचे प्लास्टिक के स्टूल थे। जब वे गले में फंदा डालकर स्टूल से नीचे उतरे तो फांसी लगने से सभी की मौत हो गई।
– वसीम सैफी


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