दुष्कर्म फिर हत्या… मट्टू हत्याकांड में दिल्ली HC का बड़ा फैसला, दोषी को दिया सरेंडर करने का आदेश; जानें क्या है ये 30 साल पुराना केस

Summary :

Priyadarshini Mattu Murder Case Update: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शीनी मट्टू हत्या के मामले में दोषी संतोष कुमार सिंह को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश मट्टू के बड़े भाई द्वारा दोषी की समय पूर्व रिहाई की याचिका का विरोध करने पर आया है। संतोष कुमार ने 1996 में प्रियदर्शिनी मट्टू के साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी थी। इस मामले में पहले ट्रायल कोर्ट ने आरोपितों को बरी कर दिया था। हालांकि, 2006 में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बदलते हुए, आरोपियों को दोषी ठहराया। Priyadarshini Mattu Murder Case Update: क्या है…

Priyadarshini Mattu Murder Case Update: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शीनी मट्टू हत्या के मामले में दोषी संतोष कुमार सिंह को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश मट्टू के बड़े भाई द्वारा दोषी की समय पूर्व रिहाई की याचिका का विरोध करने पर आया है। संतोष कुमार ने 1996 में प्रियदर्शिनी मट्टू के साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी थी। इस मामले में पहले ट्रायल कोर्ट ने आरोपितों को बरी कर दिया था। हालांकि, 2006 में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बदलते हुए, आरोपियों को दोषी ठहराया।

Priyadarshini Mattu Murder Case Update: क्या है पूरा मामला?

Priyadarshini Mattu Murder Case Update
Priyadarshini Mattu Murder Case Update (Social Media)

आपको बता दें कि, यह की ताजा मामला नहीं बल्कि बहुत पुराना है। साल 1996 की जनवरी में संतोष कुमार सिंह ने प्रियदर्शिनी मट्टू के साथ दुष्कर्म कर, उसकी हत्या कर दी थी। तब वह 25 साल की थी।
संतोष कुमार भी प्रियदर्शिनी की तरह दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून का छात्र था। जिसे 3 दिसंबर 1999 को ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के आभाव में बरी कर दिया था।

High Court on Priyadarshini Mattoo Case: मौत की सजा उम्रकैद में बदल दी गई

High Court on Priyadarshini Mattoo Case
High Court on Priyadarshini Mattoo Case (Social Media)

हालांकि, 27 अक्टूबर 2006 को दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए, उसे दुष्कर्म और हत्या का दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। जिसके बाद इस सजा को संतोष सिंह ने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने संतोष को 2010 में दोषी तो बरकरार रखा, लेकिन मौत की सजा उम्रकैद में बदल दिया गया था।

ALSO READ: अब सिर्फ तेल नहीं, खतरे में Internet! ईरान युद्ध से समुद्र के नीचे बिछी केबलों पर मंडराया संकट; क्या भारत पर भी पड़ेगा इसका असर?

Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।