कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ और 3 साल तक ‘नो रूटीन इंस्पेक्शन’ का प्रस्ताव

Summary :

Delhi Cabinet : दिल्ली कैबिनेट ने व्यवसाय सुगमता विधेयक, 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसमें कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए स्व-प्रमाणन और तीन साल तक कोई नियमित निरीक्षण नहीं करने का प्रस्ताव है। इस विधेयक कानून बनने पर व्यवसायों को मंजूरी, पंजीकरण, लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अन्य अनुमतियों के लिए कई विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता को खत्म कर देगा। इस बारे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसके लिए एकल खड़की व्यवस्था स्थापित की जाएगी, जिसके माध्यम से एक ही ऑनलाइन पोर्टल पर अधिकांश व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध होंगी। सीएम की अध्यक्षता…

Delhi Cabinet : दिल्ली कैबिनेट ने व्यवसाय सुगमता विधेयक, 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसमें कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए स्व-प्रमाणन और तीन साल तक कोई नियमित निरीक्षण नहीं करने का प्रस्ताव है। इस विधेयक कानून बनने पर व्यवसायों को मंजूरी, पंजीकरण, लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अन्य अनुमतियों के लिए कई विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता को खत्म कर देगा। इस बारे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसके लिए एकल खड़की व्यवस्था स्थापित की जाएगी, जिसके माध्यम से एक ही ऑनलाइन पोर्टल पर अधिकांश व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध होंगी।

सीएम की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे मंजूरी दे दी गई। बयान में कहा गया है कि कैबिनेट द्वारा पहले ही अनुमोदित विधेयक को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण स्वीकृति, फैक्टरी लाइसेंस, अग्नि संबंधी मंजूरी, पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन, रेरा पंजीकरण, सहकारी समितियों के पंजीकरण सहित अनेक सेवाएं इसी पोर्टल के माध्यम से तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही सीएम गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित कानून की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ‘डीम्ड अप्रूवल’ की व्यवस्था होगी यानी यदि कोई सक्षम प्राधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है तो संबंधित स्वीकृति, पंजीकरण या एनओसी स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी और आवेदक उसे सीधे ऑनलाइन पोर्टल से डाउनलोड भी कर सकेगा।

तीन वर्षों तक किसी प्रकार का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाएगा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कहा कि नए पंजीकरण के बाद सामान्य परिस्थितियों में तीन वर्षों तक किसी प्रकार का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाएगा। केवल गंभीर प्रकृति की शिकायत मिलने पर ही निरीक्षण किया जा सकेगा। इससे उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षणों से राहत मिलेगी और भरोसे पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। प्रस्तावित कानून में ‘नेगेटिव लिस्ट’ की व्यवस्था भी होगी। इसका अर्थ है कि यदि किसी गतिविधि पर सरकार ने स्पष्ट रूप से प्रतिबंध नहीं लगाया है तो उद्यम उसे कर सकेगा। इससे कारोबारियों को अधिक स्पष्ट, सरल और पूर्वानुमेय नियामकीय व्यवस्था मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी आवेदक से वह दस्तावेज या जानकारी दोबारा नहीं मांगेगी, जो पहले से दिल्ली सरकार के किसी विभाग के पास उपलब्ध है। नागरिकों और उद्यमियों को सरकार के पास एक ही जानकारी बार-बार जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अलग-अलग समय पर नवीनीकरण कराने की आवश्यकता होगी समाप्त

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए एफएआर, ग्राउंड कवरेज, सेटबैक और भवन की ऊंचाई से संबंधित कई विकास नियंत्रण प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव है। साथ ही, साझा अग्नि सुरक्षा अवसंरचना की जिम्मेदारी व्यक्तिगत इकाइयों के बजाय डीएसआईआईडीसी पर होगी। इससे उद्योगों के विस्तार की लागत कम होगी। प्रस्तावित कानून के तहत किसी भी उद्यम पर लगाए जाने वाले नियम और शर्तें उसके वास्तविक जोखिम के अनुपात में होंगी, ताकि अनावश्यक, मनमाने और सभी पर समान रूप से लागू होने वाले अनुपालन नियमों से राहत मिल सके। सरकार आवश्यकता पड़ने पर सभी लाइसेंसों और एनओसी के लिए एक समान वैधता अवधि भी अधिसूचित कर सकेगी, जिससे अलग-अलग समय पर नवीनीकरण कराने की आवश्यकता समाप्त होगी। सत्यापन और प्रमाणन जैसी सेवाओं के लिए अधिकृत पैनल में शामिल पेशेवरों तथा अन्य राज्यों में पैनल पर शामिल पेशेवरों की सेवाएं भी ली जा सकेंगी। इससे व्यवस्था की क्षमता बढ़ेगी और मंजूरियां मिलने में लगने वाला समय कम होगा।

विधेयक केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026’ सरकार और उद्यमों के बीच संबंधों को नियंत्रण और संदेह की पुरानी व्यवस्था से निकालकर भरोसे, सहयोग और सुविधा पर आधारित व्यवस्था में बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। साथ ही, वास्तविक नियम उल्लंघनों के विरुद्ध प्रभावी और कड़े निवारक प्रावधान भी लागू रहेंगे। दिल्ली सरकार का संकल्प राजधानी को देश के सबसे उद्योग-अनुकूल, निवेश-अनुकूल और रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों में स्थापित करना है। उपराज्यपाल एवं दिल्ली मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदन उपरांत, इस विधेयक को आवश्यक अग्रेतर कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय को प्रेषित किया जाएगा।

गुप्ता ने कहा कि इस विधेयक में औद्योगिक विस्तार को सुगम बनाने के उद्देश्य से तल क्षेत्र अनुपात (एफएआर), भू-आवरण क्षेत्र, ‘सेटबैक’ (भवन से आवश्यक खुला स्थान) तथा भवन की ऊंचाई से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न विकास नियंत्रण मानकों को भी ढील देने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह प्रस्तावित कानून केंद्र सरकार के अनुपालन में कमी और विनियमन-मुक्ति पहल (चरण-दो) के तहत तैयार किया गया है। यह जन विश्वास विधेयक, 2023 की भावना के अनुरूप है।

 

Sumant Chaudhary