West Delhi : बाहरी दिल्ली के नरेला स्थित सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण सर्जरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। लगभग 200 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के तीन स्वीकृत नियमित पद हैं, लेकिन वर्तमान में तीनों ही पद खाली पड़े हैं। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
तीनों नियमित पद खाली, एक एनएचएम डॉक्टर के भरोसे सर्जरी सेवाएं
अस्पताल में फिलहाल केवल एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत हैं, जिन पर ऑपरेशन थिएटर और इमरजेंसी सेवाओं का भार आ गया है। सीमित स्टाफ के चलते कई सर्जरी समय पर नहीं हो पा रही हैं, जिससे मरीजों को या तो तारीख आगे बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है या उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एनेस्थीसिया डॉक्टर केवल ऑपरेशन के दौरान ही नहीं, बल्कि आईसीयू, आपातकालीन सेवाओं और गंभीर मरीजों की देखभाल में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की कमी से अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।
इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का करना पड़ रहा रुख
स्थानीय लोगों का कहना है कि नरेला और आसपास के क्षेत्रों की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। कई मरीजों को मजबूरी में दूर स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के तीन नियमित पद स्वीकृत तीनों पद वर्तमान में खाली केवल एक विशेषज्ञ एनएचएम के तहत कार्यरत है जिससे सर्जरी और इमरजेंसी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के लिए अलावा आपातकालीन सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वही स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में सुविधाएं तो हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। ऐसे में हमें दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।


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